2 मिनट पहले
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स्टारलाइनर शनिवार सुबह 9 बजकर 32 मिनट पर सुरक्षित लैंड हुआ।
एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुश विलमोर को स्पेस स्टेशन ले जाने वाला स्पेस क्राफ्ट 3 महीने बाद धरती पर सुरक्षित लैंड हो गया है। 3 बड़े पैराशूट और एयरबैग की मदद से इसकी सुरक्षित लैंडिंग हो गई।
भारतीय समयानुसार सुबह 3:30 बजे यह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से अलग हुआ था। सुबह 9 बजकर 32 मिनट पर अमेरिकी प्रांत न्यू मैक्सिको के व्हॉइट सैंड स्पेस हॉर्बर (रेगिस्तान) में लैंड हुआ।
नासा की वेबसाइट के मुताबिक स्टारलाइनर (स्पेस क्राफ्ट) ने 9 बजकर 15 मिनट पर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया था। प्रवेश करने के बाद इसकी गति करीब 2,735 किमी प्रति घंटा थी। लैंड होने से ठीक 3 मिनट पहले स्पेसक्राफ्ट के 3 पैराशूट खुल गए।
बोइंग कंपनी NASA के साथ मिलकर यह स्पेस क्राफ्ट बनाया है। 5 जून को इससे सुनीता और बुच को ISS पर भेजा गया था। यह सिर्फ 8 दिन का मिशन था, लेकिन तकनीकी दिक्कत के कारण इसकी वापसी टालनी पड़ी थी। अब यह स्पेसक्राफ्ट बिना क्रू के पृथ्वी पर वापस आ चुका है।
स्टारलाइनर की लैंडिंग के बाद नासा और बोइंग की टीम इसे वापस असेंबली यूनिट में लेकर जाएगी। वहां पर उसकी जांच की जाएगी। पता किया जाएगा कि स्टारलाइन के प्रॉपल्शन सिस्टम में क्यों खराबी आई। किस वजह से हीलियम लीक हुई।

स्टारलाइनर कैप्सूल को भारतीय समयानुसार शनिवार करीब 3 बजकर 30 मिनट पर स्पेस स्टेशन से अनडॉक किया गया।
स्पेस स्टेशन से स्टारलाइनर को अलग होते देखिए…
The uncrewed @Boeing #Starliner spacecraft has departed the space station undocking from the Harmony module’s forward port at 6:04pm ET today. More… https://t.co/2SfoRtuiON pic.twitter.com/pp9Zua6jN7
लॉन्चिंग से वापसी तक सवाल-जवाब में जानिए इस मिशन के बारे में…
सवाल: सुनीता विलियम्स स्पेस में कब गई थीं और उन्हें कब वापस आना था? जवाब: 5 जून 2024 को सुनीता स्टारलाइनर नाम के स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर स्पेस मिशन पर गई थीं। यह अमेरिकी एयरक्राफ्ट कंपनी बोइंग और NASA का संयुक्त ‘क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन’ है। इसमें सुनीता, स्पेसक्राफ्ट की पायलट थीं। उनके साथ गए बुश विलमोर इस मिशन के कमांडर थे। दोनों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में 8 दिन रुकने के बाद वापस पृथ्वी पर आना था, लेकिन स्पेसक्राफ्ट में तकनीकी दिक्कतों और हीलियम गैस के रिसाव के चलते सुनीता वहीं फंसी हैं।

6 जून को स्पेस स्टेशन पहुंचने के बाद क्रू के साथ बुश विल्मोर और सुनीता विलियम्स।
सवाल: सुनीता और विलमोर को स्पेस स्टेशन पर क्यों भेजा गया था? जवाब: बोइंग की तरफ से कहा गया था कि ये लॉन्च, NASA और बोइंग के स्टारलाइनर क्रू फ्लाइट टेस्ट की शुरुआत है। लॉन्च के समय बोइंग डिफेंस, स्पेस एंड सिक्योरिटी के प्रेसिडेंट और CEO टेड कोलबर्ट ने इसे स्पेस रिसर्च के नए युग की शानदार शुरुआत बताया था।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य स्पेसक्राफ्ट की एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन तक ले जाकर वापस लाने की क्षमता साबित करना था। एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन पर 8 दिन में रिसर्च और कई एक्सपेरिमेंट भी करने थे। सुनीता और विलमोर पहले एस्ट्रोनॉट्स हैं जो एटलस-वी रॉकेट के जरिए स्पेस ट्रैवेल पर भेजे गए। इस मिशन के दौरान उन्हें स्पेसक्राफ्ट को मैन्युअली उड़ाना था। फ्लाइट टेस्ट से जुड़े कई तरह के ऑब्जेक्टिव भी पूरे करने थे।
सवाल: सुनीता के स्पेस क्राफ्ट के साथ क्या दिक्कत हुई जिसके चलते वह स्पेस में फंस गई? जवाब: लॉन्च से पहले और बाद में स्पेसक्राफ्ट में लगातार दिक्कतें आईं…
- 5 जून को जब स्पेसक्राफ्ट लॉन्च करने की कोशिश की गई तो ऐन वक्त पर इसके कंप्यूटर में कुछ खराबी आ गई थी। पहली कोशिश बेकार गई। दूसरी बार में इसे लॉन्च किया गया। इसके पहले 6 मई को भी लॉन्च की कोशिश हुई, लेकिन लॉन्च से ठीक दो घंटे पहले रॉकेट की ऊपरी स्टेज में एक प्रेशर वॉल्व में दिक्कत होने के चलते लॉन्च की उल्टी गिनती रोक दी गई थी।
- 5 जून को लॉन्च के पहले ही स्पेसक्राफ्ट में ऑक्सीडाइजर का फ्लो कंट्रोल करने वाले एक वॉल्व में गड़बड़ी आ गई थी। ऑक्सीडाइजर मतलब ऐसे केमिकल जो रॉकेट के फ्यूल को जलाने के लिए जरूरी होते हैं। ऑक्सीडाइजर की मदद से जब रॉकेट का फ्यूल जलता है तभी रॉकेट अपना रास्ता बदल पाते हैं। लॉन्च के पहले ही वॉल्व से भिनभिनाहट जैसी आवाज आ रही थी।
- NASA ने ये भी कहा था कि स्पेसक्राफ्ट के सर्विस मॉड्यूल के थ्रस्टर में एक छोटा सा हीलियम लीक है। एक स्पेसक्राफ्ट में कई थ्रस्टर होते हैं। इनकी मदद से स्पेसक्राफ्ट अपना रास्ता और स्पीड बदलता है। वहीं हीलियम गैस होने की वजह से रॉकेट पर दबाव बनता है। उसका ढांचा मजबूत बना रहता है, जिससे रॉकेट को अपनी फ्लाइट में मदद मिलती है।
- ब्रिटिश न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक लॉन्च के बाद 25 दिनों में स्पेसक्राफ्ट के कैप्सूल में 5 हीलियम लीक हुए। 5 थ्रस्टर्स काम करना बंद कर चुके थे। इसके अलावा एक प्रॉपेलेंट वॉल्व पूरी तरह बंद नहीं किया जा सका। स्पेस में मौजूद क्रू और अमेरिका के ह्यूस्टन में बैठे मिशन के मैनेजर मिलकर भी इसे ठीक नहीं कर पा रहे हैं।

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में सुनीता विलियम्स और बुश विलमोर। तस्वीर 9 जुलाई 2024 की है।

सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष से 250 दिन बाद लौटेंगी: हड्डियां-आंखें कमजोर हो जाएंगी, डीएनए में बदलाव संभव; भविष्य में कैंसर का खतरा
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स दो महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अंतरिक्ष में हैं। अब उनकी वापसी फरवरी 2025 में होगी। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में लगभग 250 दिन बिताए होंगे। लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने की वजह से उनके शरीर, आंख और डीएनए में कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। पूरी खबर पढ़ें…



























