सौराष्ट्र के कई जिलों में भारी तबाही मचा सकता है चक्रवात।
कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के बीच अब गुजरात में चक्रवात का खतरा भी मंडरा रहा है। कुछ दिन पहले बंगाल की खाड़ी के ऊपर डीप डिप्रेशन बना था, जो वेलमार्क निम्न दबाव में तब्दील हो गया है। जो भुज से 60 किमी दूर और कराची (पाकिस्तान) से 270 किमी पूर्व-दक
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मौसम विभाग के मुताबिक, इसी डीप डिप्रेशन के असर से गुजरात में पिछले एक हफ्ते से भीषण बारिश हो रही है और कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। पिछले दिनों तक माना जा रहा था कि यह डीप डिप्रेशन कमजोर हो जाएगा, लेकिन आज की तारीख में यह डीप डिप्रेशन कमजोर होने की बजाय मजबूत हो गया है और 30 अगस्त 2024 तक तूफान में तब्दील हो सकता है।
65 से 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

30 और 31 अगस्त को तटीय इलाकों में 55 से 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी।
मौसम विभाग के वैज्ञानिक रामाश्रय यादव के मुताबिक अगले तीन दिनों तक गुजरात राज्य में अभी भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। आज भी खासतौर पर कच्छ और सौराष्ट्र के जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। मछुआरों को अगले तीन दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि आज और कल से दो दिनों के दौरान यानी 30 और 31 अगस्त को तटीय इलाकों में 65 से 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी। हवा की स्पीड 85 किमी प्रति घंटा तक भी जा सकती है। इसीलिए एहतियात के तौर पर सौराष्ट्र के तटीय इलाकों में एलसी-3 सिग्नल जारी कर दिया गया है।
अब बदल गया है दवाब का रूट
आमतौर पर बंगाल की खाड़ी में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ बढ़ता है। लेकिन, उसका रूट होता है बिहार, यूपी, हरियाणा और पंजाब। ये दवाब रास्ते में जाते वक्त भयानक बारिश करते हुए आगे बढ़ता है। लेकिन इस बार बारिश वाले कम दबाव के क्षेत्र ने अपना रूट बदल दिया। ये मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान होते हुए पश्चिम की तरफ जा रहा है।

इस साल बंगाल की खाड़ी के ऊपर चार लो-प्रेशर एरिया और दो डिप्रेशन बने।
मौसम विज्ञान इसकी वजह जलवायु परिवर्तन को मानते हैं। मौसम का हाल बताने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के वाइस प्रेसिडेंट महेश पालावत के अनुसार क्लाइमेट चेंज सबसे बड़ी वजह है. इसकी वजह से राज्यों के ऊपर बारिश का पैटर्न बदला है। इस साल बंगाल की खाड़ी के ऊपर चार लो-प्रेशर एरिया और दो डिप्रेशन बने। इन सबने उत्तर-पश्चिमी रूट ने पकड़कर पश्चिम वाला रूट पकड़ा।
भारती मौसम विज्ञान केंद्र की साइंटिस्ट सोमा सेन के मुताबिक पश्चिम बंगाल की ओर कई लो-प्रेशर एरिया बने हैं। इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। जिसकी वजह से बेतरतीब बारिश हो रही है। अगस्त के महीने में ज्यादा लो-प्रेशर सिस्टम देखने को मिलते हैं, जिसकी वजह से कई राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश होती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। मौसम के पैटर्न में कोई बदलाव नहीं है। पश्चिम की तरफ मॉनसूनी बारिश का घूमना एक सामान्य प्रक्रिया है। अक्सर देखने को मिलती है।

















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