ढाका2 घंटे पहले
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बांग्लादेश में कई दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्र आरक्षण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
बांग्लादेश में हजारों छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहे हैं। इस प्रदर्शन ने अब हिंसक रूप ले लिया है। पुलिस के साथ झड़प में 6 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 400 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल बताए जा रहे हैं।
बांग्लादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक बुधवार शाम राजधानी ढाका में आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प में एक बच्चे समेत छह लोगों को गोली लगी है। हालात इतने ज्यादा खराब हो गए हैं कि ढाका सहित बांग्लादेश के अलग-अलग शहरों में शिक्षण संस्थानों को अनिश्चित काल तक के लिए बंद कर दिया गया है।
गुरुवार को देशभर में बंदी, आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी
प्रदर्शनकारी छात्रों ने गुरुवार को देशभर में बंदी की घोषणा की है। छात्र आंदोलन के नेताओं ने कहा है कि गुरुवार को हॉस्पिटल और आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी चीजें बंद रहेंगी। इस दौरान सिर्फ एम्बुलेंस सर्विस को ही सड़कों पर निकलने की छूट रहेगी।
हिंसा की तस्वीरें देखिए…

15 जुलाई को ढाका में जहांगीर नगर विश्वविद्यालय में रिजर्वेशन के खिलाफ हिंसा भड़की।

सरकार समर्थक छात्र संगठन और आरक्षण विरोधी छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प बुधवार को जारी रही।

तस्वीर ढाका यूनिवर्सिटी की जहां कई दिनों से हिंसा जारी है। इसमें सबसे ज्यादा छात्राएं घायल है।

इन प्रदर्शन में छात्राएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।
बांग्लादेश में पिछले 4 दिनों से हिंसा जारी है।

बांग्लादेश में छात्र संगठनों ने गुरुवार को देशव्यापी बंद का आह्वान किया है।
PM हसीना ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू नहीं होने दिया
ये छात्र 1971 के मुक्ति युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों के बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का विरोध कर रहे हैं। इससे एक हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर रोक लगा दी थी, लेकिन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस फैसले को लागू नहीं होने दिया। हसीना सरकार का कहना है कि ये फैसला उनके हाथों में है।
बांग्लादेश में पाकिस्तान के खिलाफ 1971 की जंग लड़ने वाले लोगों को वॉर हीरो कहा जाता है। बांग्लादेश में 30% नौकरियां इन वॉर हीरो के बच्चों के लिए रिजर्व हैं। इसी रिजर्वेशन के खिलाफ छात्रों का गुस्सा भड़का हुआ है। छात्रों की मांग है कि मेरिट के आधार पर नौकरियां दी जानी जाहिए। किसी के पूर्वज वॉर हीरो थे इसका मतलब ये नहीं कि उनके बच्चों को भी इसका लाभ मिले।
PM हसीना का राष्ट्र के नाम संबोधन
इस बीच बुधवार को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। उन्होंने घोषणा की है कि रिजर्वेशन के खिलाफ आंदोलन में हुई मौतों की जांच के लिए एक न्यायिक जांच समिति गठित की जाएगी। इस दौरान शेख हसीना ने प्रदर्शनकारी छात्रों से देश की न्यायिक प्रणाली में विश्वास बनाए रखने की अपील की। उन्होंने छात्रों को यकीन दिलाया कि उन्हें न्याय मिलेगा।
शेख हसीना ने आरक्षण विरोध प्रदर्शन में हुए जानमाल के नुकसान पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने छात्रों से अपील किया कि वे उपद्रवियों को स्थिति का फायदा उठाने का मौका न दें। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने हत्याएं की हैं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें कटघरे में लाया जाएगा, चाहे वे किसी भी पार्टी से जुड़े हों।
जनवरी में हुए आम चुनाव के बाद पहली बार बड़े पैमाने पर प्रदर्शनइस साल जनवरी में हुए आम चुनाव के बाद ये पहली बार है जब देश में इतने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों को 1971 में बांग्लादेश को आजादी दिलाने वाले लोगों के बच्चे भी शामिल हैं। लोगों का कहना है कि हसीना सरकार ने उन लोगों को आरक्षण दिया है, जिनकी आमदनी ज्यादा है।
ये लोग वे लोग है जिन्हें हसीना का वोटर्स माना जाता है। सरकार का कहना है कि विकलांग लोगों और अल्पसंख्यक समुदाय लोगों को नौकरी में 30% आरक्षण दिया गया था।
क्या हैं आरक्षण नियम ?
प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2018 में नए आरक्षण नियम लागू किया था। इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को नौकरी में 30%, पिछड़े जिलों के लिए 10%, महिलाओं के लिए 10%, अल्पसंख्यकों के लिए 5% और 1% विकलांगों को दिया गया है। इस लिहाज से सरकारी नौकरियों में 56% आरक्षण है। इसी के खिलाफ पूरे देश में प्रदर्शन हो रहा है।
स्टूडेंट्स की 5 मांगे हैं….
1- आरक्षण 56% से घटाकर इसे 10% किया जाए।
2- अगर कोई आरक्षित सीटों से योग्य उम्मीदवार नहीं मिलता है तो भर्ती मेरिट लिस्ट से कि जाए।
3- सभी के लिए एक समान परीक्षा हो।
4- सभी उम्मीदवारों के लिए उम्र सामान हो।
5- कोई भी उम्मीदवार एक बार से ज्यादा बार आरक्षण का इस्तेमाल न करें।