
चंडीगढ़ पीजीआई
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चंडीगढ़ पीजीआई में कर्मचारियों और अधिकारियों की रार छह महीनों से मरीजों की परेशानी का कारण बनी हुई है। स्थिति यह है कि कॉन्ट्रैक्ट पर तैनात लगभग 3500 कर्मचारियों को अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए प्रदर्शन और हड़ताल करनी पड़ रही है।
इनका कहना है कि पीजीआई प्रशासन हर बार उन्हें लिखित आश्वासन देकर मुकर रहा है। जनवरी से अब तक तीन बार हड़ताल हो चुकी है। वहीं, पीजीआई के जॉइंट एक्शन कमेटी ने सोमवार को एक बार फिर पीजीआई प्रशासन को नोटिस देकर चेताया है कि कर्मचारी 27 जून को सुबह 6 बजे से हड़ताल पर रहेंगे। कर्मचारियों ने यह तय किया है कि वे मांगें पूरी होने के बाद ही काम पर लौटेंगे।
पीजीआई प्रशासन का कहना है कि वे अपने स्तर पर पूरा प्रयास कर रहे हैं कि कर्मचारियों को उनके हक मिलें लेकिन प्रक्रिया लंबी होने के कारण थोड़ा वक्त लगा रहा है। ऐसे में बार-बार हड़ताल पर जाने के बजाय उन्हें बैठकर बात करने पर विचार करना चाहिए ताकि समस्या का हल निकाला जा सके।
जॉइंट एक्शन कमेटी के अध्यक्ष अश्विनी कुमार मुंजाल का कहना है कि पीजीआई प्रशासन बार-बार लिखित आश्वासन देकर मुकर रहा है। कमेटी की ओर से पीजीआई प्रशासन को 21 जून तक बढ़ा हुआ वेतन कर्मचारियों के खाते में डालने की समय सीमा देने के बावजूद कोई पहल न करने पर हड़ताल का निर्णय लिया गया है।
पीजीआई प्रशासन ने 13 जून को 1183 हॉस्पिटल अटेंडेंट और 25 सुपरवाइजर के लिए जैम पोर्टल पर टेंडर डाल दिया है, जिसमें ठेकेदार कंपनियों को कर्मचारियों को डीसी रेट देने के लिए दिशा निर्देश किया गया है। यह भर्ती प्रक्रिया संस्थान के उच्च अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा करती है क्योंकि पहले जो कर्मचारी कार्यरत हैं, उनकी ही मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। बता दें कि इस साल की शुरुआत में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वेतन का बकाया जारी करने के लिए पीजीआईएमईआर को 46 करोड़ की राशि मंजूर की थी। इसके बावजूद भुगतान में
आनाकानी की जा रही है।
10 हजार से ज्यादा मरीज होते हैं परेशान
पीजीआई की ओपीडी में प्रतिदिन 8 से 10 हजार मरीज इलाज कराने आते हैं। उन मरीजों में चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार के साथ ही देश के लगभग हर कोने से मरीज आते हैं। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों की हड़ताल से इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक की व्यवस्था प्रभावित होती है। दूर-दराज से आए मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ता है। ऑपरेशन टलते हैं। डॉक्टरों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।
घटनाक्रम एक नजर में
- 20 जनवरी 2024 को कर्मचारियों ने हड़ताल की, जो एक दिन चली।
- 4 अप्रैल को पुन: कर्मचारियों ने हड़ताल की, जो दो दिन चली।
- 11 जून को कर्मचारियों ने हड़ताल की, जो एक दिन चली।
इन बिन्दुओं पर चल रहा विरोध
- कर्मचारियों को जुलाई से फिर से पुराने डीसी रेट पर वेतन देने की बात
- कर्मचारियों को नियमित करने की मांग
- 1600 हॉस्पिटल अटेंडेंट के 28 करोड़ का जिक्र न होना
- संगरूर के कर्मचारियों के लिए 2 करोड़ शामिल न किया जाना
























