
लुधियाना में मतदान के लिए लगी भीड़
– फोटो : संवाद (फाइल)
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पंजाब में लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने इस बार 70 पार का लक्ष्य तय किया था, लेकिन आयोग के उम्मीद के मुताबिक इस बार मतदान नहीं हुआ है। मतदान होने के बाद सभी दलों ने अपना गुणा-भाग लगाकर जीत का दावा करना शुरू कर दिया है। सभी दल अपने पुराने बेहतरीन रिकार्ड को दोहराने की उम्मीद जता रहे हैं।
अगर पुराने रिकार्ड को देखा जाए तो पंजाब में 1977 से लेकर 2019 तक 12 बार लोकसभा चुनाव हुआ है, जिसमें दो बार मत प्रतिशत 70 पार रहा। दोनों ही बार शिरोमणि अकाली दल को इसका फायदा मिला है। 1977 लोकसभा चुनाव में 70 पार मतदान होने पर शिअद ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इसी तरह वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो 70.89 प्रतिशत मतदान रहा था और इस चुनाव में शिअद ने भाजपा के साथ गठबंधन में कुल 6 सीटों पर अपना कब्जा किया था। आप को भी इस चुनाव में फायदा मिला था और वह 4 सीटें जीतने में सफल रही थी, जबकि कांग्रेस के हाथ सिर्फ 3 सीटें लगी थी।
इसके बाद भी वर्ष 2019 में 65.96 प्रतिशत मतदान हुआ था, लेकिन इस बार कांग्रेस ने अपना कमाल दिखाया था और कुल 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी 2, शिअद 2 और आप 1 सीट पर सिमट गई थी। उस समय प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन इस बार परस्थितियां बदल गई हैं। इस बार पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है।
इसी तरह सबसे कम प्रतिशत रहने पर दो बार प्रदेश में कांग्रेस को फायदा मिला है। 1992 लोकसभा चुनाव में सबसे कम 23.96 फीसद मतदान हुआ था। उस दौरान पंजाब में आतंकवाद का भी दौर चल रहा था और ये भी मतदान प्रतिशत कम रहने के कारण बना था।
चुनाव में कांग्रेस ने रिकार्ड 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि एक सीट बसपा ने जीती थी। इसी तरह 1999 के चुनाव में भी सिर्फ 56.11 फीसद मतदान हुआ था। तब भी कांग्रेस 8 सीटें जीतने में सफल रही थी। तब शिअद 2, भाजपा 1, सीपीआई 1 और शिअद अमृतसर भी 1 सीट में सफल रही थी। इसके अलावा 1980 के चुनाव में 62.65 फीसदी मतदान हुआ था और तब भी कांग्रेस ने 12 सीटें जीती थी, जबकि शिअद के हाथ 1 सीट लगी थी।
96, 98 व 2004 में भी शिअद का प्रदर्शन रहा ठीक
1996, 1998 व 2004 में भी शिअद का प्रदर्शन ठीक रहा था। 1996 लोकसभा चुनाव में 62.25 फीसद मतदान हुआ था। तब शिअद ने 8, बसपा 2 व कांग्रेस ने 2 सीटें जीती थी। इस तरह 1998 चुनाव में मतदान प्रतिशत 60.07 प्रतिशत रहा और शिअद 8, भाजपा 3 व जनता दल एक सीट जीतने में सफल रही थी। वर्ष 2009 में भी कांग्रेस ने 8 सीटें जीती थी और तब शिअद के हाथ 4 व भाजपा 1 सीट जीतने में सफल रही थी। इस बार राजनीतिक दलों का गुणा-भाग काम नहीं आ रहा है, क्योंकि सभी दल इस बार अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा व शिअद का गठबंधन नहीं हो पाया। आप व कांग्रेस दूसरे राज्यों में तो एक साथ चुनाव लड़ रही है, लेकिन पंजाब में अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरी है। यही कारण है कि प्रदेश में इस बार आखिरी दम तक तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है।
मतदान प्रतिशत इस बार भी कम हुआ है, लेकिन इस बार किसी पार्टी को इसका नुक्सान होगा, ये कहना मुश्किल है। इसका प्रमुख कारण ये है कि इस बार सभी राजनीतिक दल अलग्-अलग चुनाव मैदान में उतरे हैं। यही कारण है कि इस प्रदेश में स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। दरअसल इस बार पंजाब में चुनावी नतीजे दिलचस्प रहने वाले हैं, जो पिछले चुनावों से अलग होंगे। -वीके कपूर, राजनीतिक विशेषज्ञ।


























