
Lok Sabha Election 2024
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
किसानों के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन टूटने और शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक बड़े बादल यानी प्रकाश सिंह बाल के निधन के बाद यह पहला लोकसभा चुनाव है। मगर, आप, कांग्रेस और भाजपा ने छोटे बादल और शिअद प्रधान सुखवीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर की बठिंडा में जिस तरह घेराबंदी की है, उससे चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है।
शिअद ने अपना गढ़ बचाने और आप ने छीनने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। बठिंडा के रोज गार्डन में मॉर्निंग वॉक के लिए आए सेवानिवृत्त कर्मचारी रणवीर सिंह कहते हैं, लगातार जीत के आदी रहे बुजुर्ग बड़े बादल हार का सदमा सहन नहीं कर पाए और एक साल पूरा होते-होते उनका निधन हो गया। वह बहुत अच्छे नेता थे। जब वह मुख्यमंत्री थे तो कांग्रेस और आप के नेता अलग-अलग उनके आवास पर धरना देने पहुंच गए।
बड़े बादल ने उनके लिए टेंट लगवाए और उनकी बात सुनी। आज कहां हैं ऐसे लोग? इस सीट पर बादल की बहू व पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर लगातार तीन बार से सांसद हैं और चौथी बार मैदान में हैं। आप ने अब हरसिमरत के सामने गुरमीत सिंह खुडियां को ही उतारा है। खास बात है कि बठिंडा लोकसभा क्षेत्र में जो नौ विधानसभा सीटें हैं, वर्तमान में उन सभी पर आप का ही कब्जा है।
मुश्किलें इतनी भर नहीं हैं। गठबंधन तोड़ने से नाखुश भाजपा भी अपने पुराने सहयोगी दल को जैसे सबक सिखाने पर आमादा है। उसने पूर्व आईएएस अधिकारी परमपाल कौर को प्रत्याशी बनाया है। परमपाल वीआरएस लेकर चुनाव मैदान में आई हैं।



























