
दिनेश बब्बू, सुखजिंदर सिंह रंधावा, अमनशेर सिंह और दलजीत सिंह चीमा
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भाजपा से सांसद रहे दिग्गज फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना और अब मौजूदा सांसद सनी देओल की वजह से गुरदासपुर सीट देश की हाईप्रोफाइल सीटों में से एक रही है। हालांकि, इस बार यहां ‘तितली’ की चर्चा है। दरअसल, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में अपने घोषित प्रत्याशी के भाजपा में शामिल होने पर तंज कसा था कि ये सब तितलियां हैं। ये इधर से उधर कब चली जाएं, किसी को पता नहीं। इन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। अब मान स्वर्ण सलारिया के रूप में भाजपा की एक तितली पकड़ लाए हैं…और दावा कर रहे हैं कि यह तितली भरोसेमंद है।
वर्ष 2017 में सांसद विनोद खन्ना के निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने स्वर्ण सलारिया को उतारा था। तब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ ने उन्हें करारी शिकस्त दी थी। भाजपा का गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर कांग्रेस की सेंधमारी का असर हिमाचल प्रदेश तक हुआ। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सलारिया के गांव चौहाना में ही भाजपा 53 वोट से हार गई। सलारिया इस बार भी लोकसभा का टिकट मांग रहे थे। उन्हें हराने वाले सुनील जाखड़ अब पंजाब भाजपा के अध्यक्ष हैं। जाखड़ का कहना है कि तितलियों की उड़ान से हवा के रुख का पता नहीं चलता।
आम आदमी पार्टी गुरदासपुर सीट पर विशेष जोर लगा रही है। आप प्रत्याशी अमनशेर सिंह (शेरी कलसी) के पक्ष में पहली चुनावी रैली में सीएम भगवंत मान ने सांसद सनी देओल के बाहरी होने का मुद्दा उठाया। तंज कसा कि वे पर्दे पर ही हैंडपंप उखाड़ सकते हैं, यहां उनसे कुछ नहीं होगा। आप स्थानीय नेताओं को तोड़कर भगवा गढ़ में सेंध लगा रही है। मगर, भाजपा ने उससे बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा छीन लिया है। पार्टी ने स्थानीय नेता व सुजानपुर विधायक दिनेश बब्बू को मौका दिया है। कांग्रेस ने सुखजिंदर सिंह रंधावा को उम्मीदवार बनाया है। वह चार बार के विधायक और पूर्व डिप्टी सीएम हैं। उनका कद जरूर बड़ा है, लेकिन पार्टी में एकजुटता नहीं दिख रही।
यहां सबसे कठिन चुनाव शिरोमणि अकाली दल के लिए है। भाजपा के साथ गठबंधन में रहने पर शिअद ने यहां से कभी चुनाव नहीं लड़ा। यहां के कठिन मुकाबले में शिअद ने पूर्व मंत्री डॉ़ दलजीत सिंह चीमा को मैदान में उतारा है। वह अभी तक रोपड़ से चुनाव लड़ते रहे हैं। गुरदासपुर उनके लिए नई जमीन है।
सिख गुरुओं की धरती का रामनगरी से गहरा नाता
सिख गुरुओं की धरती गुरदासपुर का रामनगरी से गहरा नाता है। 17वीं शताब्दी में गुरदासपुर शहर की स्थापना करने वाले गुरियाजी के पूर्वज अयोध्या से आकर ही यहां पनियार गांव में बसे थे। भाजपा यहां सिख समुदाय में भी राममंदिर के प्रति खुशी को वोट में तब्दील करने का प्रयास कर रही है।
नशा, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था बड़े मुद्दे
गुरुदासपुर के दीनानगर विधानसभा क्षेत्र में शिक्षक दिनेश शर्मा बताते हैं कि पाकिस्तान सीमा से सटा होने की वजह से नशा तस्करी बड़ी समस्या है। इससे देश विरोधी गतिविधियां भी होने लगी हैं।
- रावी नदी के किनारे के बाशिंदे हरजोत ने स्वास्थ्य व शिक्षा की समस्या उठाई। पठानकोट में व्यापारी संजीव महाजन ने कहा, आप की सरकार में काम नहीं हो रहे। अधिकारी सुनते नहीं। व्यापारी सुभाष शर्मा बीच में ही बोल पड़े, कानून व्यवस्था तो उससे भी खराब। दिनदहाड़े हत्याएं होने लगी हैं।




























