पेरिस10 घंटे पहले
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न्यू कैलेडोनिया में फ्रांस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज।
फ्रांस से 16 हजार किलोमीटर दूर साउथ पैसेफिक ओशन (प्रशांत महासागर) में स्थित न्यू कैलेडोनिया आइलैंड पर मतदान संबंधी नियमों के लेकर तीन दिनों से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। इस आइलैंड पर 171 साल से फ्रांस का कब्जा है। दंगों में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है और 64 घायल हैं।
पुलिस ने 200 लोगों को गिरफ्तार किया है। फ्रांस की सरकार ने खुद इसकी जानकारी संसद में दी है। सरकार ने वहां 12 दिनों के लिए आपातकाल लगा दिया है। इस दौरान किसी के भी बाहर निकलने पर पाबंदी लगाई गई है। एयरपोर्ट्स और बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। सड़कों पर सेना के टैंक गश्त कर रहे हैं।

फांस और न्यू कैलेडोनिया के बीच की दूरी 16 हजार किलोमीटर है। (मैप प्रतीकात्मक है)
फ्रांस के खिलाफ क्यों उग्र हुए न्यू कैलेडोनिया के लोग?
फ्रांस के न्यूज चैनल France 24 के मुताबिक, फ्रांस ने हाल ही में न्यू कैलेडोनिया में मतदान नियमों में बदलाव वाला विधेयक (बिल) पास किया था। इस बिल के तहत न्यू कैलेडोनिया में वहां के मूल निवासियों के अलावा फ्रांस से जाकर वहां बसने वाले लोगों को भी वोटिंग का अधिकार दिया गया है।
इसे लेकर वहां की तीन नगर पालिकाओं में 5 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी बिल का विरोध कर रहे हैं। न्यू कैलेडोनिया एक आइलैंड है। प्रदर्शनकारियों ने यहां जगह-जगह पर बैरिकेड लगा दिए है, जिससे जरूरी सेवाएं ठप हो गई है।
हिंसा की तस्वीरें देखे…

न्यू कैलेडोनिया के दंगों में इतनी आगजनी हुई की आसमान पूरा धुएं से भर गया।

प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक स्टोर को आग के हवाले कर दिया।

न्यू कैलेडोनिया के सभी नेशनल हाइवे बंद कर दिए गए हैं।

प्रदर्शनकारियों ने शहर की दुकानों को आग के हवाले किया।

न्यू कैलेडोनिया में फ्रांस कार निर्माता कंपनी रेनॉल्ट के शोरूम को आग के हवाले कर दिया।

पूरे शहर में सेना के टैंकों को सड़को पर उतरा गया है।
फ्रांस से अलग होने की मांग कर रहे लोग…
प्रदर्शनकारियों ने शहर में दुकानों को लूटना शुरू कर दिया है और कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लोग अब फ्रांस से अलग होना चाहते हैं। पिछले कुछ सालों से न्यू कैलेडोनिया के लोग अलग देश की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वहां केवल 1800 ही पुलिसकर्मी है। सरकार ने दंगे को रोकने के लिए टिक टॉक पर भी बैन लगा दिया गया है।
इन दंगों का असर पडोसी देश ऑस्ट्रेलिया पर भी दिखने लगा है। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामलों के मंत्री पेनी वोंग ने लोगों से अपील की है कि वो न्यू कैलेडोनिया न जाएं।। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में शांति बनी रहनी चाहिए। ऑस्ट्रेलियाई सरकार बातचीत के पक्ष में है। वोंग ने न्यू कैलेडोनिया के लोग से कहा है कि आपको बातचीत का रास्ता चुनना चाहिए।
फ्रांस ने कैसे न्यू कैलेडोनिया पर कब्जा किया?
न्यू कैलेडोनिया में 1774 में पहली बार व्यापार के इरादे से ब्रिटिश नाविक जेम्स कुक पहुंचा था। उसके बाद उसने वहां से व्यापार करना शुरू किया। व्यापार को बढ़ाने के लिए फ्रांसीसी नाविक एंटॉइन डी ब्रूनी भी वहां पहुंचा। 1841 में ब्रिटेन के लंदन मिशनरी सोसायटी ने वहां अपना डेरा जमाया। उस वक्त फ्रांस और ब्रिटेन में ज्यादा से ज्यादा देशों को कब्जे में लेने की होड़ थी। इसी वजह से 1843 से फ्रांस ने वहां अपनी नेवी को भेजना शुरू किया। इसके बाद दोनों के बीच जंग हुई और 1853 में फ्रांस ने पूरे आइलैंड पर कब्जा कर लिया। तब से लेकर आज वहां फ्रांस का कब्जा है।


























