• Latest
  • Trending
  • All
जब राक्षस समझकर भरतजी ने चलाया बाण, मूर्च्छित होकर जमीन पर गिर पड़े हनुमानजी

जब राक्षस समझकर भरतजी ने चलाया बाण, मूर्च्छित होकर जमीन पर गिर पड़े हनुमानजी

3 years ago
Video captures moment when Himalayan glacier collapsed, leading to catastrophic Nepal-Tibet flash flood

Video captures moment when Himalayan glacier collapsed, leading to catastrophic Nepal-Tibet flash flood

2 hours ago
Shooter Ashi Chouksey Looking Forward To Chinese Challenge At Asian Games: ‘Looking For Revenge’ | Other-sports News

Shooter Ashi Chouksey Looking Forward To Chinese Challenge At Asian Games: ‘Looking For Revenge’ | Other-sports News

2 hours ago
राहुल गांधी ने प्रोजेक्टर पर खड़गे का भाषण दिखाया:कहा- हल्द्वानी में उनकी सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण हुआ; प्रधानमंत्री दोषियों पर एक्शन लें

राहुल गांधी ने प्रोजेक्टर पर खड़गे का भाषण दिखाया:कहा- हल्द्वानी में उनकी सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण हुआ; प्रधानमंत्री दोषियों पर एक्शन लें

2 hours ago
महिला एशिया कप 2026:भारत कल शुरू करेगा अभियान, थाईलैंड से है पहला मुकाबला; क्या हो सकती है प्लेइंग-11? जानें – Women’s Asia Cup 2026: India Begin Campaign Against Thailand, Consistency And Form In Focus

महिला एशिया कप 2026:भारत कल शुरू करेगा अभियान, थाईलैंड से है पहला मुकाबला; क्या हो सकती है प्लेइंग-11? जानें – Women’s Asia Cup 2026: India Begin Campaign Against Thailand, Consistency And Form In Focus

2 hours ago
Nagarjuna’s 100th film King 100 gets its title on his 67th birthday; to clash with SRK’s King

Nagarjuna’s 100th film King 100 gets its title on his 67th birthday; to clash with SRK’s King

3 hours ago
Why is Aga Ruhullah Mehdi resigning as Srinagar MP? What are his differences with NC leadership?

Why is Aga Ruhullah Mehdi resigning as Srinagar MP? What are his differences with NC leadership?

3 hours ago
उज्बेकिस्तान के लिए रवाना हुए पीएम मोदी, SCO शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे, कहा- ‘आतंकवाद खत्म करेंगे’

उज्बेकिस्तान के लिए रवाना हुए पीएम मोदी, SCO शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे, कहा- ‘आतंकवाद खत्म करेंगे’

4 hours ago
Mahindra ने पलट दिया MG का खेल, 7-सीटर SUV पर लाई गजब ऑफर, इतनी है कीमत – mahindra xev 9s xev 9e baas launch price range features auam

Mahindra ने पलट दिया MG का खेल, 7-सीटर SUV पर लाई गजब ऑफर, इतनी है कीमत – mahindra xev 9s xev 9e baas launch price range features auam

4 hours ago
‘मिशन क्लीन पंजाब’ शुरू:स्वास्थ्य मंत्री ने खुद सफाई कर पटियाला से किया आगाज, सात सितंबर तक चलेगा अभियान – ‘mission Clean Punjab’ Launched Health Minister In Patiala Will Continue Until September 7

‘मिशन क्लीन पंजाब’ शुरू:स्वास्थ्य मंत्री ने खुद सफाई कर पटियाला से किया आगाज, सात सितंबर तक चलेगा अभियान – ‘mission Clean Punjab’ Launched Health Minister In Patiala Will Continue Until September 7

6 hours ago
CM Suvendu Warns Jadavpur Students Over ‘Azaadi’ Slogans: ‘I Know The Disease And Medicine’ | India News

CM Suvendu Warns Jadavpur Students Over ‘Azaadi’ Slogans: ‘I Know The Disease And Medicine’ | India News

6 hours ago
Nepal Flash Floods: 320 Indians Missing, 400 Stranded In Tibet, India Offers Rescue Support

Nepal Flash Floods: 320 Indians Missing, 400 Stranded In Tibet, India Offers Rescue Support

7 hours ago
रात के बचे चावल से बनाएं टेस्टी पराठे, आलू-पनीर का स्वाद भूल जाएंगे आप

रात के बचे चावल से बनाएं टेस्टी पराठे, आलू-पनीर का स्वाद भूल जाएंगे आप

8 hours ago
Saturday, August 29, 2026
  • PRESS RELEASE
  • ADVERTISE
  • CONTACT
  • Game
India News Online
  • Home
  • News
    • India
    • Punjab
    • International
    • Entertainment
  • Hindi News
  • Politics
  • Health
  • Business
  • Sports
  • Technology
  • Lifestyle
  • Video
    • All
    • Hindi Songs
    • Punjabi Songs
    Built Different (Official Music Video) Saabi Bhinder | Cheetah | New Punjabi Songs 2026

    Built Different (Official Music Video) Saabi Bhinder | Cheetah | New Punjabi Songs 2026

    DEKHI JA – Parmish Verma Ft. Kiran Bajwa | Victory Lap (Official Music Video)

    DEKHI JA – Parmish Verma Ft. Kiran Bajwa | Victory Lap (Official Music Video)

    Sarpanch Title Track | Gulab Sidhu | Dev Kharoud | Avvy Sra | Ohri Productions | Rel 10th July 2026

    Sarpanch Title Track | Gulab Sidhu | Dev Kharoud | Avvy Sra | Ohri Productions | Rel 10th July 2026

    पियवा किसनवा 90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu songs Hindi

    पियवा किसनवा 90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu songs Hindi

    90s Bollywood Wedding Songs | Evergreen Bollywood Hits | Shadi Song | Sadabahar Hindi Songs Jukebox

    90s Bollywood Wedding Songs | Evergreen Bollywood Hits | Shadi Song | Sadabahar Hindi Songs Jukebox

    आज तो बाल बाल बच गया😄90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu song

    आज तो बाल बाल बच गया😄90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu song

    भाभी ने बचाई ननद की जान 😆 90’S Old Hindi Songs 🥺90s Love Song 😍Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar

    भाभी ने बचाई ननद की जान 😆 90’S Old Hindi Songs 🥺90s Love Song 😍Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar

    90s हिंदी सदाबहार गीत | 90’s Romantic Hindi Songs | 90’s सदाबहार फिल्मी गाने | 90’s Bollywood Songs

    90s हिंदी सदाबहार गीत | 90’s Romantic Hindi Songs | 90’s सदाबहार फिल्मी गाने | 90’s Bollywood Songs

    90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu songs Hindi Jukebox

    90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu songs Hindi Jukebox

  • Travel
  • Game
No Result
View All Result
India News
No Result
View All Result
Home Hindi News

जब राक्षस समझकर भरतजी ने चलाया बाण, मूर्च्छित होकर जमीन पर गिर पड़े हनुमानजी

by India News Online Team
January 29, 2024
in Hindi News
0
जब राक्षस समझकर भरतजी ने चलाया बाण, मूर्च्छित होकर जमीन पर गिर पड़े हनुमानजी
Share on FacebookShare on TwitterShare on Email


(राम आ चुके हैं…जी हां, सदियों के लंबे इंतजार के बाद भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है और प्रभु श्रीराम अपनी पूरी भव्यता-दिव्यता के साथ उसमें विराजमान हो गए हैं. इस पावन अवसर पर aajtak.in अपने पाठकों के लिए लाया है तुलसीदास द्वारा अवधी में लिखी गई राम की कथा का हिंदी रूपांतरण (साभारः गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीरामचरितमानस).  इस श्रृंखला ‘रामचरित मानस’ में आप पढ़ेंगे भगवान राम के जन्म से लेकर लंका पर विजय तक की पूरी कहानी. आज पेश है इसका 26वां खंड…)


जब राक्षस समझकर भरतजी ने चलाया बाण, मूर्च्छित होकर जमीन पर गिर पड़े हनुमानजी

अंगदजी लंका से लौट आए. उधर सन्ध्या हो गई जानकर दशग्रीव उदास होकर महल में गया. मंदोदरी ने रावण को समझाकर फिर कहा- हे कान्त! मन में समझकर (विचारकर) कुबुद्धि को छोड़ दो. आप से और श्री रघुनाथजी से युद्ध शोभा नहीं देता. उनके छोटे भाई ने एक जरा सी रेखा खींच दी थी, उसे भी आप नहीं लांघ सके, ऐसा तो आपका पुरुषत्व है. हे प्रियतम! आप उन्हें संग्राम में जीत पाएंगे, जिनके दूत का ऐसा काम है? खेल से ही समुद्र लांघकर वह वानरों में सिंह (हनुमान) आपकी लंका में निर्भय चला आया! रखवालों को मारकर उसने अशोक वन उजाड़ डाला. आपके देखते-देखते उसने अक्षयकुमार को मार डाला और संपूर्ण नगर को जलाकर राख कर दिया. उस समय आपके बल का गर्व कहां चला गया था?

अब हे स्वामी! झूठ (व्यर्थ) गाल न मारिए (डींग न हांकिए) मेरे कहने पर हृदय में कुछ विचार कीजिए. हे पति! आप श्री रघुपति को (निरा) राजा मत समझिए, बल्कि अग-जगनाथ (चराचर के स्वामी) और अतुलनीय बलवान जानिए. श्री रामजी के बाण का प्रताप तो नीच मारीच भी जानता था, परन्तु आपने उसका कहना भी नहीं माना. जनक की सभा में अगणित राजागण थे. वहां विशाल और अतुलनीय बल वाले आप भी थे. वहां शिवजी का धनुष तोड़कर श्री रामजी ने जानकी को ब्याहा, तब आपने उनको संग्राम में क्यों नहीं जीता? इंद्रपुत्र जयन्त उनके बल को कुछ-कुछ जानता है. श्री रामजी ने पकड़कर, केवल उसकी एक आंख ही फोड़ दी और उसे जीवित ही छोड़ दिया. शूर्पणखा की दशा तो आपने देख ही ली. तो भी आपके हृदय में (उनसे लड़ने की बात सोचते) विशेष (कुछ भी) लज्जा नहीं आती! जिन्होंने विराध और खर-दूषण को मारकर लीला से ही कबन्ध को भी मार डाला और जिन्होंने बाली को एक ही बाण से मार दिया, हे दशकन्ध! आप उन्हें (उनके महत्व को) समझिए! जिन्होंने खेल से ही समुद्र को बंधा लिया और जो प्रभु सेना सहित सुबेल पर्वत पर उतर पड़े, उन सूर्यकुल के ध्वजास्वरूप (कीर्ति को बढ़ाने वाले) करुणामय भगवान ने आप ही के हित के लिए दूत भेजा. जिसने बीच सभा में आकर आपके बल को उसी प्रकार मथ डाला जैसे हाथियों के झुंड में आकर सिंह (उसे छिन्न-भिन्न कर डालता है) रण में बांके अत्यंत विकट वीर अंगद और हनुमान जिनके सेवक हैं. हे पति! उन्हें आप बार-बार मनुष्य कहते हैं. आप व्यर्थ ही मान, ममता और मद का बोझ ढो रहे हैं! हा प्रियतम! आपने श्री रामजी से विरोध कर लिया और काल के विशेष वश होने से आपके मन में अब भी ज्ञान नहीं उत्पन्न होता.  

राम मंदिरः राम जन्मभूमि का वर्चुअल टूर और अयोध्या गाइड

काल दण्ड (लाठी) लेकर किसी को नहीं मारता. वह धर्म, बल, बुद्धि और विचार को हर लेता है. हे स्वामी! जिसका काल (मरण समय) निकट आ जाता है, उसे आप ही की तरह भ्रम हो जाता है. आपके दो पुत्र मारे गए और नगर जल गया. (जो हुआ सो हुआ) हे प्रियतम! अब भी इस भूल की पूर्ति (समाप्ति) कर दीजिए. श्री रामजी से वैर त्याग दीजिए और हे नाथ! कृपा के समुद्र श्री रघुनाथजी को भजकर निर्मल यश लीजिए. स्त्री के बाण के समान वचन सुनकर वह सबेरा होते ही उठकर सभा में चला गया और सारा भय भुलाकर अत्यंत अभिमान में फूलकर सिंहासन पर जा बैठा.  


यहां (सुबेल पर्वत पर) श्री रामजी ने अंगद को बुलाया. उन्होंने आकर चरणकमलों में सिर नवाया. बड़े आदर से उन्हें पास बैठाकर खर के शत्रु कृपालु श्री रामजी हंसकर बोले- हे बाली के पुत्र! मुझे बड़ा कौतूहल है. हे तात! इसी से मैं तुमसे पूछता हूं, सत्य कहना. जो रावण राक्षसों के कुल का तिलक है और जिसके अतुलनीय बाहुबल की जगतभर में धाक है, उसके चार मुकुट तुमने फेंके. हे तात! बताओ, तुमने उनको किस प्रकार से पाया! अंगद ने कहा- हे सर्वज्ञ! हे शरणागत को सुख देने वाले! सुनिए. वे मुकुट नहीं हैं. वे तो राजा के चार गुण हैं. हे नाथ! वेद कहते हैं कि साम, दान, दंड और भेद- ये चारों राजा के हृदय में बसते हैं. ये नीति-धर्म के चार सुंदर चरण हैं, (किन्तु रावण में धर्म का अभाव है) ऐसा जी में जानकर ये नाथ के पास आ गए हैं.

दशशीश रावण धर्महीन, प्रभु के पद से विमुख और काल के वश में है, इसलिए हे कोसलराज! सुनिए, वे गुण रावण को छोड़कर आपके पास आ गए हैं. अंगद की परम चतुरता (पूर्ण उक्ति) कानों से सुनकर उदार श्री रामचंद्रजी हंसने लगे. फिर बाली पुत्र ने किले के (लंका के) सब समाचार कहे. जब शत्रु के समाचार प्राप्त हो गए, तब श्री रामचंद्रजी ने सब मंत्रियों को पास बुलाया और कहा- लंका के चार बड़े विकट दरवाजे हैं. उन पर किस तरह आक्रमण किया जाए, इस पर विचार करो. तब वानरराज सुग्रीव, ऋक्षपति जाम्बवान और विभीषण ने हृदय में सूर्य कुल के भूषण श्री रघुनाथजी का स्मरण किया और विचार करके उन्होंने कर्तव्य निश्चित किया. वानरों की सेना के चार दल बनाए. वे हर्षित होकर श्री रामजी के चरणों में सिर नवाते हैं और पर्वतों के शिखर ले-लेकर सब वीर दौड़ते हैं. ‘कोसलराज श्री रघुवीरजी की जय हो’ पुकारते हुए भालू और वानर गरजते और ललकारते हैं. लंका को अत्यंत श्रेष्ठ (अजेय) किला जानते हुए भी वानर प्रभु श्री रामचंद्रजी के प्रताप से निडर होकर चले. चारों ओर से घिरी हुई बादलों की घटा की तरह लंका को चारों दिशाओं से घेरकर वे मुंह से डंके और भेरी बजाने लगे.

 

 

महान बल की सीमा वे वानर-भालू सिंह के समान ऊंचे स्वर से ‘श्री रामजी की जय’, ‘लक्ष्मणजी की जय’, ‘वानरराज सुग्रीव की जय’- ऐसी गर्जना करने लगे. लंका में बड़ा भारी कोलाहल (कोहराम) मच गया. अत्यंत अहंकारी रावण ने उसे सुनकर कहा- वानरों की ढिठाई तो देखो! यह कहते हुए हंसकर उसने राक्षसों की सेना बुलाई, बंदर काल की प्रेरणा से चले आए हैं. मेरे राक्षस सभी भूखे हैं. विधाता ने इन्हें घर बैठे भोजन भेज दिया. ऐसा कहकर उस मूर्ख ने अट्टहास किया. वह बड़े जोर से ठहाका मारकर हंसा. और बोला- हे वीरो! सब लोग चारों दिशाओं में जाओ और रीछ-वानर सबको पकड़-पकड़कर खाओ. रावण को ऐसा अभिमान था जैसा टिटिहिरी पक्षी पैर ऊपर की ओर करके सोता है मानो आकाश को थाम लेगा. आज्ञा मांगकर और हाथों में उत्तम भिंदिपाल, सांगी (बरछी), तोमर, मुद्गर, प्रचण्ड फरसे, शूल, दोधारी तलवार, परिघ और पहाड़ों के टुकड़े लेकर राक्षस चले. जैसे मूर्ख मांसाहारी पक्षी लाल पत्थरों का समूह देखकर उस पर टूट पड़ते हैं, पत्थरों पर लगने से चोंच टूटने का दुःख उन्हें नहीं सूझता, वैसे ही ये बेसमझ राक्षस दौड़े. अनेकों प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और धनुष-बाण धारण किए करोड़ों बलवान और रणधीर राक्षस वीर परकोटे के कंगूरों पर चढ़ गए.

वे परकोटे के कंगूरों पर कैसे शोभित हो रहे हैं, मानो सुमेरु के शिखरों पर बादल बैठे हों. जुझाऊ ढोल और डंके आदि बज रहे हैं, जिनकी ध्वनि सुनकर योद्धाओं के मन में लड़ने का चाव होता है. अगणित नफीरी और भेरी बज रही है, (जिन्हें) सुनकर कायरों के हृदय में दरारें पड़ जाती हैं. उन्होंने जाकर अत्यन्त विशाल शरीर वाले महान् योद्धा वानर और भालुओं के ठट्ट (समूह) देखे. देखा कि) वे रीछ-वानर दौड़ते हैं, औघट (ऊंची-नीची, विकट) घाटियों को कुछ नहीं गिनते. पकड़कर पहाड़ों को फोड़कर रास्ता बना लेते हैं. करोड़ों योद्धा कटकटाते और गर्जते हैं. दांतों से होठ काटते और खूब डपटते हैं. उधर रावण की और इधर श्री रामजी की दुहाई बोली जा रही है. ‘जय’ ‘जय’ ‘जय’ की ध्वनि होते ही लड़ाई छिड़ गई. राक्षस पहाड़ों के ढेर के ढेर शिखरों को फेंकते हैं. वानर कूदकर उन्हें पकड़ लेते हैं और वापस उन्हीं की ओर चलाते हैं. प्रचण्ड वानर और भालू पर्वतों के टुकड़े ले-लेकर किले पर डालते हैं. वे झपटते हैं और राक्षसों के पैर पकड़कर उन्हें पृथ्वी पर पटककर भाग चलते हैं और फिर ललकारते हैं. बहुत ही चंचल और बड़े तेजस्वी वानर-भालू बड़ी फुर्ती से उछलकर किले पर चढ़-चढ़कर गए और जहां-तहां महलों में घुसकर श्री रामजी का यश गाने लगे. फिर एक-एक राक्षस को पकड़कर वे वानर भाग चले. ऊपर आप और नीचे राक्षस योद्धा- इस प्रकार किले से धरती पर आ गिरते हैं.


श्री रामजी के प्रताप से प्रबल वानरों के झुंड राक्षस योद्धाओं के समूह के समूह मसल रहे हैं. वानर फिर जहां-तहां किले पर चढ़ गए और प्रताप में सूर्य के समान श्री रघुवीर की जय बोलने लगे. राक्षसों के झुंड वैसे ही भाग चले जैसे जोर की हवा चलने पर बादलों के समूह तितर-बितर हो जाते हैं. लंका नगरी में बड़ा भारी हाहाकार मच गया. बालक, स्त्रियां और रोगी (असमर्थता के कारण) रोने लगे. सब मिलकर रावण को गालियां देने लगे कि राज्य करते हुए इसने मृत्यु को बुला लिया. रावण ने जब अपनी सेना का विचलित होना कानों से सुना, तब (भागते हुए) योद्धाओं को लौटाकर वह क्रोधित होकर बोला- मैं जिसे रण से पीठ देकर भागा हुआ अपने कानों सुनूंगा, उसे स्वयं भयानक दोधारी तलवार से मारूंगा. मेरा सब कुछ खाया, भांति-भांति के भोग किए और अब रणभूमि में प्राण प्यारे हो गए! रावण के उग्र (कठोर) वचन सुनकर सब वीर डर गए और लज्जित होकर क्रोध करके युद्ध के लिए लौट चले. रण में (शत्रु के) सम्मुख युद्ध करते हुए मरने में ही वीर की शोभा है. यह सोचकर तब उन्होंने प्राणों का लोभ छोड़ दिया. बहुत से अस्त्र-शस्त्र धारण किए, सब वीर ललकार-ललकारकर भिड़ने लगे. उन्होंने परिघों और त्रिशूलों से मार-मारकर सब रीछ-वानरों को व्याकुल कर दिया. वानर भयातुर होकर (डर के मारे घबड़ाकर) भागने लगे. कोई कहता है- अंगद-हनुमान कहां हैं? बलवान् नल, नील और द्विविद कहां हैं?

हनुमानजी ने जब अपने दल को विकल (भयभीत) हुआ सुना, उस समय वे बलवान पश्चिम द्वार पर थे. वहां उनसे मेघनाद युद्ध कर रहा था. वह द्वार टूटता न था, बड़ी भारी कठिनाई हो रही थी. तब पवनपुत्र हनुमानजी के मन में बड़ा भारी क्रोध हुआ. वे काल के समान योद्धा बड़े जोर से गरजे और कूदकर लंका के किले पर आ गए और पहाड़ लेकर मेघनाद की ओर दौड़े. रथ तोड़ डाला, सारथी को मार गिराया और मेघनाद की छाती में लात मारी. दूसरा सारथी मेघनाद को व्याकुल जानकर, उसे रथ में डालकर, तुरंत घर ले आया. इधर अंगद ने सुना कि पवनपुत्र हनुमान किले पर अकेले ही गए हैं, तो रण में बांके बाली पुत्र वानर के खेल की तरह उछलकर किले पर चढ़ गए. युद्ध में शत्रुओं के विरुद्ध दोनों वानर क्रुद्ध हो गए. हृदय में श्री रामजी के प्रताप का स्मरण करके दोनों दौड़कर रावण के महल पर जा चढ़े और कोसलराज श्री रामजी की दुहाई बोलने लगे. उन्होंने कलश सहित महल को पकड़कर ढहा दिया. यह देखकर राक्षस राज रावण डर गया. सब स्त्रियां हाथों से छाती पीटने लगीं (और कहने लगीं-) अब की बार दो उत्पाती वानर (एक साथ) आ गए हैं. वानरलीला करके (घुड़की देकर) दोनों उनको डराते हैं और श्री रामचंद्रजी का सुंदर यश सुनाते हैं. फिर सोने के खंभों को हाथों से पकड़कर उन्होंने (परस्पर) कहा कि अब उत्पात आरंभ किया जाए.

Quiz: अयोध्या राम मंदिर के लिए रामलला की मूर्तियों को किसने बनाया? क्लिक कर बताइए

वे गर्जकर शत्रु की सेना के बीच में कूद पड़े और अपने भारी भुजबल से उसका मर्दन करने लगे. किसी की लात से और किसी की थप्पड़ से खबर लेते हैं (और कहते हैं कि) तुम श्री रामजी को नहीं भजते, उसका यह फल लो. एक को दूसरे से (रगड़कर) मसल डालते हैं और सिरों को तोड़कर फेंकते हैं. वे सिर जाकर रावण के सामने गिरते हैं और ऐसे फूटते हैं, मानो दही के कूंडे फूट रहे हों. जिन बड़े-बड़े मुखियों (प्रधान सेनापतियों) को पकड़ पाते हैं, उनके पैर पकड़कर उन्हें प्रभु के पास फेंक देते हैं. विभीषणजी उनके नाम बतलाते हैं और श्री रामजी उन्हें भी अपना धाम (परम पद) दे देते हैं. ब्राह्मणों का मांस खाने वाले वे नरभोजी दुष्ट राक्षस भी वह परम गति पाते हैं, जिसकी योगी भी याचना किया करते हैं, (परन्तु सहज में नहीं पाते).  श्री रामजी बड़े ही कोमल हृदय और करुणा की खान हैं. वे सोचते हैं कि राक्षस मुझे वैरभाव से ही सही, स्मरण तो करते ही हैं. ऐसा हृदय में जानकर वे उन्हें परमगति (मोक्ष) देते हैं. प्रभु का ऐसा स्वभाव सुनकर भी जो मनुष्य भ्रम त्याग कर उनका भजन नहीं करते, वे अत्यंत मंदबुद्धि और परम भाग्यहीन हैं. श्री रामजी ने कहा कि अंगद और हनुमान किले में घुस गए हैं. दोनों वानर लंका में (विध्वंस करते) कैसे शोभा देते हैं, जैसे दो मन्दराचल समुद्र को मथ रहे हों.

भुजाओं के बल से शत्रु की सेना को कुचलकर और मसलकर, फिर दिन का अंत होता देखकर हनुमान और अंगद दोनों कूद पड़े और श्रम थकावट रहित होकर वहां आ गए, जहां भगवान् श्री रामजी थे. उन्होंने प्रभु के चरण कमलों में सिर नवाए. उत्तम योद्धाओं को देखकर श्री रघुनाथजी मन में बहुत प्रसन्न हुए. श्री रामजी ने कृपा करके दोनों को देखा, जिससे वे श्रमरहित और परम सुखी हो गए. अंगद और हनुमान को गए जानकर सभी भालू और वानर वीर लौट पड़े. राक्षसों ने प्रदोष (सायं) काल का बल पाकर रावण की दुहाई देते हुए वानरों पर धावा किया. राक्षसों की सेना आती देखकर वानर लौट पड़े और वे योद्धा जहां-तहां कटकटाकर भिड़ गए. दोनों ही दल बड़े बलवान हैं. योद्धा ललकार-ललकारकर ल़ड़ते हैं, कोई हार नहीं मानते. सभी राक्षस महान वीर और अत्यंत काले हैं और वानर विशालकाय तथा अनेकों रंगों के हैं. दोनों ही दल बलवान हैं और समान बल वाले योद्धा हैं. वे क्रोध करके लड़ते हैं और खेल करते (वीरता दिखलाते) हैं. राक्षस और वानर युद्ध करते हुए ऐसे जान पड़ते हैं, मानो क्रमशः वर्षा और शरद् ऋतु में बहुत से बादल पवन से प्रेरित होकर लड़ रहे हों. अकंपन और अतिकाय इन सेनापतियों ने अपनी सेना को विचलित होते देखकर माया की. पलभर में अत्यंत अंधकार हो गया. खून, पत्थर और राख की वर्षा होने लगी. दसों दिशाओं में अत्यंत घना अंधकार देखकर वानरों की सेना में खलबली पड़ गई. एक को एक (दूसरा) नहीं देख सकता और सब जहां-तहां पुकार रहे हैं.


श्री रघुनाथजी सब रहस्य जान गए. उन्होंने अंगद और हनुमान को बुला लिया और सब समाचार कहकर समझाया. सुनते ही वे दोनों कपिश्रेष्ठ क्रोध करके दौड़े. फिर कृपालु श्री रामजी ने हंसकर धनुष चलाया और तुरंत ही अग्निबाण चलाया, जिससे प्रकाश हो गया, कहीं अंधेरा नहीं रह गया. जैसे ज्ञान के उदय होने पर सब प्रकार के संदेह दूर हो जाते हैं. भालू और वानर प्रकाश पाकर श्रम और भय से रहित तथा प्रसन्न होकर दौड़े. हनुमान और अंगद रण में गरज उठे. उनकी हांक सुनते ही राक्षस भाग छूटे. भागते हुए राक्षस योद्धाओं को वानर और भालू पकड़कर पृथ्वी पर दे मारते हैं और अद्भुत (आश्चर्यजनक) करनी करते हैं (युद्धकौशल दिखलाते हैं). पैर पकड़कर उन्हें समुद्र में डाल देते हैं. वहां मगर, सांप और मच्छ उन्हें पकड़-पकड़कर खा डालते हैं. कुछ मारे गए, कुछ घायल हुए, कुछ भागकर गढ़ पर चढ़ गए. अपने बल से शत्रुदल को विचलित करके रीछ और वानर (वीर) गरज रहे हैं. रात हुई जानकर वानरों की चारों सेनाएं (टुकड़ियां) वहां आईं, जहां कोसलपति श्री रामजी थे. श्री रामजी ने ज्यों ही सबको कृपा करके देखा त्यों ही ये वानर श्रमरहित हो गए.

वहां (लंका में) रावण ने मंत्रियों को बुलाया और जो योद्धा मारे गए थे, उन सबको सबसे बताया. (उसने कहा-) वानरों ने आधी सेना का संहार कर दिया! अब शीघ्र बताओ, क्या विचार (उपाय) करना चाहिए? माल्यवंत नाम का एक अत्यंत बूढ़ा राक्षस था. वह रावण की माता का पिता (अर्थात् उसका नाना) और श्रेष्ठ मंत्री था. वह अत्यंत पवित्र नीति के वचन बोला- हे तात! कुछ मेरी सीख भी सुनो- जब से तुम सीता को हर लाए हो, तब से इतने अपशकुन हो रहे हैं कि जो वर्णन नहीं किए जा सकते. वेद-पुराणों ने जिनका यश गाया है, उन श्री राम से विमुख होकर किसी ने सुख नहीं पाया. भाई हिरण्यकशिपु सहित हिरण्याक्ष को बलवान मधु-कैटभ को जिन्होंने मारा था, वे ही कृपा के समुद्र भगवान (रामरूप से) अवतरित हुए हैं. जो कालस्वरूप हैं, दुष्टों के समूह रूपी वन के भस्म करने वाले (अग्नि) हैं, गुणों के धाम और ज्ञानघन हैं एवं शिवजी और ब्रह्माजी भी जिनकी सेवा करते हैं, उनसे वैर कैसा? अतः वैर छोड़कर उन्हें जानकीजी को दे दो और कृपानिधान परम स्नेही श्री रामजी का भजन करो. रावण को उसके वचन बाण के समान लगे. वह बोला- अरे अभागे! मुंह काला करके यहां से निकल जा. तू बूढ़ा हो गया, नहीं तो तुझे मार ही डालता. अब मेरी आंखों को अपना मुंह न दिखला. रावण के ये वचन सुनकर उसने (माल्यवान ने) अपने मन में ऐसा अनुमान किया कि इसे कृपानिधान श्री रामजी अब मारना ही चाहते हैं.  

वह रावण को दुर्वचन कहता हुआ उठकर चला गया. तब मेघनाद क्रोधपूर्वक बोला- सबेरे मेरी करामात देखना. मैं बहुत कुछ करूंगा, थोड़ा क्या कहूं? पुत्र के वचन सुनकर रावण को भरोसा आ गया. उसने प्रेम के साथ उसे गोद में बैठा लिया. विचार करते-करते ही सबेरा हो गया. वानर फिर चारों दरवाजों पर जा लगे. वानरों ने क्रोध करके दुर्गम किले को घेर लिया. नगर में बहुत ही कोलाहल (शोर) मच गया. राक्षस बहुत तरह के अस्त्र-शस्त्र धारण करके दौड़े और उन्होंने किले पर पहाड़ों के शिखर ढहाए. उन्होंने पर्वतों के करोड़ों शिखर ढहाए, अनेक प्रकार से गोले चलने लगे. वे गोले ऐसा घहराते हैं जैसे वज्रपात हुआ हो (बिजली गिरी हो) और योद्धा ऐसे गरजते हैं, मानो प्रलयकाल के बादल हों. विकट वानर योद्धा भिड़ते हैं, कट जाते हैं (घायल हो जाते हैं), उनके शरीर जर्जर (चलनी) हो जाते हैं, तब भी वे लटते नहीं (हिम्मत नहीं हारते). वे पहाड़ उठाकर उसे किले पर फेंकते हैं. राक्षस जहां के तहां (जो जहां होते हैं, वहीं) मारे जाते हैं. मेघनाद ने कानों से ऐसा सुना कि वानरों ने आकर फिर किले को घेर लिया है. तब वह वीर किले से उतरा और डंका बजाकर उनके सामने चला. मेघनाद ने पुकारकर कहा- समस्त लोकों में प्रसिद्ध धनुर्धर कोसलाधीश दोनों भाई कहां हैं? नल, नील, द्विविद, सुग्रीव और बल की सीमा अंगद और हनुमान् कहां हैं? भाई से द्रोह करने वाला विभीषण कहां है? आज मैं सबको और उस दुष्ट को तो हठपूर्वक (अवश्य ही) मारूंगा. ऐसा कहकर उसने धनुष पर कठिन बाणों का सन्धान किया और अत्यंत क्रोध करके उसे कान तक खींचा. 


वह बाणों के समूह छोड़ने लगा. मानो बहुत से पंखवाले सांप दौड़े जा रहे हों. जहां-तहां वानर गिरते दिखाई पड़ने लगे. उस समय कोई भी उसके सामने न हो सके. रीछ-वानर जहां-तहां भाग चले. सबको युद्ध की इच्छा भूल गई. रणभूमि में ऐसा एक भी वानर या भालू नहीं दिखाई पड़ा, जिसको उसने प्राणमात्र अवशेष न कर दिया हो (अर्थात् जिसके केवल प्राणमात्र ही न बचे हों, बल, पुरुषार्थ सारा जाता न रहा हो. फिर उसने सबको दस-दस बाण मारे, वानर वीर पृथ्वी पर गिर पड़े. बलवान् और धीर मेघनाद सिंह के समान नाद करके गरजने लगा. सारी सेना को बेहाल (व्याकुल) देखकर पवनसुत हनुमान क्रोध करके ऐसे दौड़े मानो स्वयं काल दौड़ आता हो. उन्होंने तुरंत एक बड़ा भारी पहाड़ उखाड़ लिया और बड़े ही क्रोध के साथ उसे मेघनाद पर छोड़ा. पहाड़ों को आते देखकर वह आकाश में उड़ गया. (उसके) रथ, सारथी और घोड़े सब नष्ट हो गए (चूर-चूर हो गए) हनुमानजी उसे बार-बार ललकारते हैं. पर वह निकट नहीं आता, क्योंकि वह उनके बल का मर्म जानता था. तब) मेघनाद श्री रघुनाथजी के पास गया और उसने उनके प्रति अनेकों प्रकार के दुर्वचनों का प्रयोग किया. फिर उसने उन पर अस्त्र-शस्त्र तथा और सब हथियार चलाए. प्रभु ने खेल में ही सबको काटकर अलग कर दिया. श्री रामजी का प्रताप (सामर्थ्य) देखकर वह मूर्ख लज्जित हो गया और अनेकों प्रकार की माया करने लगा. जैसे कोई व्यक्ति छोटा सा सांप का बच्चा हाथ में लेकर गरुड़ को डरावे और उससे खेल करे.

शिवजी और ब्रह्माजी तक बड़े-छोटे (सभी) जिनकी अत्यंत बलवान माया के वश में हैं, नीच बुद्धि निशाचर उनको अपनी माया दिखलाता है. आकाश में ऊंचे चढ़कर वह बहुत से अंगारे बरसाने लगा. पृथ्वी से जल की धाराएं प्रकट होने लगीं. अनेक प्रकार के पिशाच तथा पिशाचिनियां नाच-नाचकर ‘मारो, काटो’ की आवाज करने लगीं. वह कभी तो विष्टा, पीब, खून, बाल और हड्डियां बरसाता था और कभी बहुत से पत्थर फेंक देता था. फिर उसने धूल बरसाकर ऐसा अंधेरा कर दिया कि अपना ही पसारा हुआ हाथ नहीं सूझता था. माया देखकर वानर अकुला उठे. वे सोचने लगे कि इस हिसाब से इसी तरह रहा तो सबका मरण आ बना. यह कौतुक देखकर श्री रामजी मुस्कुराए. उन्होंने जान लिया कि सब वानर भयभीत हो गए हैं. तब श्री रामजी ने एक ही बाण से सारी माया काट डाली, जैसे सूर्य अंधकार के समूह को हर लेता है. तदनन्तर उन्होंने कृपाभरी दृष्टि से वानर-भालुओं की ओर देखा, (जिससे) वे ऐसे प्रबल हो गए कि रण में रोकने पर भी नहीं रुकते थे. श्री रामजी से आज्ञा मांगकर, अंगद आदि वानरों के साथ हाथों में धनुष-बाण लिए हुए श्री लक्ष्मणजी क्रुद्ध होकर चले. उनके लाल नेत्र हैं, चौड़ी छाती और विशाल भुजाएं हैं. हिमाचल पर्वत के समान उज्ज्वल (गौरवर्ण) शरीर कुछ ललाई लिए हुए है. इधर रावण ने भी बड़े-बड़े योद्धा भेजे, जो अनेकों अस्त्र-शस्त्र लेकर दौड़े.

Quiz: राम मंदिर पर गुंबदों की नियोजित संख्या क्या है? क्लिक कर बताइए

पर्वत, नख और वृक्ष रूपी हथियार धारण किए हुए वानर ‘श्री रामचंद्रजी की जय’ पुकारकर दौड़े. वानर और राक्षस सब जोड़ी से जोड़ी भिड़ गए. इधर और उधर दोनों ओर जय की इच्छा कम न थी (अर्थात् प्रबल थी). वानर उनको घूंसों और लातों से मारते हैं, दांतों से काटते हैं. विजयशील वानर उन्हें मारकर फिर डांटते भी हैं. ‘मारो, मारो, पकड़ो, पकड़ो, पकड़कर मार दो, सिर तोड़ दो और भुजाएं पकड़कर उखाड़ लो’. नवों खंडों में ऐसी आवाज भर रही है. प्रचंड रुंड (धड़) जहां-तहां दौड़ रहे हैं. आकाश में देवतागण यह कौतुक देख रहे हैं. उन्हें कभी खेद होता है और कभी आनंद. खून गड्ढों में भर-भरकर जम गया है और उस पर धूल उड़कर पड़ रही है (वह दृश्य ऐसा है) मानो अंगारों के ढेरों पर राख छा रही हो. घायल वीर कैसे शोभित हैं, जैसे फूले हुए पलास के पेड़. लक्ष्मण और मेघनाद दोनों योद्धा अत्यंत क्रोध करके एक-दूसरे से भिड़ते हैं. एक-दूसरे को जीत नहीं सकता. राक्षस छल-बल (माया) और अनीति (अधर्म) करता है, तब भगवान अनन्तजी (लक्ष्मणजी) क्रोधित हुए और उन्होंने तुरंत उसके रथ को तोड़ डाला और सारथी को टुकड़े-टुकड़े कर दिया! शेषजी (लक्ष्मणजी) उस पर अनेक प्रकार से प्रहार करने लगे. राक्षस के प्राणमात्र शेष रह गए. रावणपुत्र मेघनाद ने मन में अनुमान किया कि अब तो प्राण संकट आ बना, ए मेरे प्राण हर लेंगे. तब उसने वीरघातिनी शक्ति चलाई. वह तेजपूर्ण शक्ति लक्ष्मणजी की छाती में लगी. शक्ति लगने से उन्हें मूर्छा आ गई. तब मेघनाद भय छोड़कर उनके पास चला गया.


मेघनाद के समान सौ करोड़ (अगणित) योद्धा उन्हें उठा रहे हैं, परन्तु जगत् के आधार श्री शेषजी (लक्ष्मणजी) उनसे कैसे उठते? तब वे लजाकर चले गए. सुनो, (प्रलयकाल में) जिन (शेषनाग) के क्रोध की अग्नि चौदहों भुवनों को तुरंत ही जला डालती है और देवता, मनुष्य तथा समस्त चराचर (जीव) जिनकी सेवा करते हैं, उनको संग्राम में कौन जीत सकता है? इस लीला को वही जान सकता है, जिस पर श्री रामजी की कृपा हो. संध्या होने पर दोनों ओर की सेनाएं लौट पड़ीं, सेनापति अपनी-अपनी सेनाएं संभालने लगे. व्यापक, ब्रह्म, अजेय, संपूर्ण ब्रह्मांड के ईश्वर और करुणा की खान श्री रामचंद्रजी ने पूछा- लक्ष्मण कहां है? तब तक हनुमान उन्हें ले आए. छोटे भाई को इस दशा में देखकर प्रभु ने बहुत ही दुःख माना. जाम्बवान ने कहा- लंका में सुषेण वैद्य रहता है, उसे लाने के लिए किसको भेजा जाए? हनुमानजी छोटा रूप धरकर गए और सुषेण को उसके घर समेत तुरंत ही उठा लाए. सुषेण ने आकर श्री रामजी के चरणारविन्दों में सिर नवाया. उसने पर्वत और औषध का नाम बताया, और कहा कि हे पवनपुत्र! औषधि लेने जाओ.  

श्री रामजी के चरणकमलों को हृदय में रखकर पवनपुत्र हनुमानजी अपना बल बखानकर चले. उधर एक गुप्तचर ने रावण को इस रहस्य की खबर दी. तब रावण कालनेमि के घर आया. रावण ने उसको सारा मर्म (हाल) बतलाया. कालनेमि ने सुना और बार-बार सिर पीटा (खेद प्रकट किया). उसने कहा- तुम्हारे देखते-देखते जिसने नगर जला डाला, उसका मार्ग कौन रोक सकता है? श्री रघुनाथजी का भजन करके तुम अपना कल्याण करो! हे नाथ! झूठी बकवास छोड़ दो. नेत्रों को आनंद देने वाले नीलकमल के समान सुंदर श्याम शरीर को अपने हृदय में रखो. मैं-तू (भेद-भाव) और ममता रूपी मूढ़ता को त्याग दो. महामोह (अज्ञान) रूपी रात्रि में सो रहे हो, सो जाग उठो, जो काल रूपी सर्प का भी भक्षक है, कहीं स्वप्न में भी वह रण में जीता जा सकता है? उसकी ये बातें सुनकर रावण बहुत ही क्रोधित हुआ. तब कालनेमि ने मन में विचार किया कि (इसके हाथ से मरने की अपेक्षा) श्री रामजी के दूत के हाथ से ही मरूं तो अच्छा है. यह दुष्ट तो पाप समूह में रत है. वह मन ही मन ऐसा कहकर चला और उसने मार्ग में माया रची. तालाब, मंदिर और सुंदर बाग बनाया. हनुमानजी ने सुंदर आश्रम देखकर सोचा कि मुनि से पूछकर जल पी लूं, जिससे थकावट दूर हो जाए. राक्षस वहा कपट से मुनि का वेष बनाए विराजमान था. वह मूर्ख अपनी माया से मायापति के दूत को मोहित करना चाहता था. मारुति ने उसके पास जाकर मस्तक नवाया. वह श्री रामजी के गुणों की कथा कहने लगा.

 

 

वह बोला- रावण और राम में महान युद्ध हो रहा है. रामजी जीतेंगे, इसमें संदेह नहीं है. हे भाई! मैं यहां रहता हुआ ही सब देख रहा हूं. मुझे ज्ञानदृष्टि का बहुत बड़ा बल है. हनुमानजी ने उससे जल मांगा, तो उसने कमण्डलु दे दिया. हनुमानजी ने कहा- थोड़े जल से मैं तृप्त नहीं होने का. तब वह बोला- तालाब में स्नान करके तुरंत लौट आओ तो मैं तुम्हे दीक्षा दूं, जिससे तुम ज्ञान प्राप्त करो. तालाब में प्रवेश करते ही एक मगरी ने अकुलाकर उसी समय हनुमानजी का पैर पकड़ लिया. हनुमानजी ने उसे मार डाला. तब वह दिव्य देह धारण करके विमान पर चढ़कर आकाश को चली. उसने कहा- हे वानर! मैं तुम्हारे दर्शन से पापरहित हो गई. हे तात! श्रेष्ठ मुनि का शाप मिट गया. हे कपि! यह मुनि नहीं है, घोर निशाचर है. मेरा वचन सत्य मानो. ऐसा कहकर ज्यों ही वह अप्सरा गई, त्यों ही हनुमानजी निशाचर के पास गए. हनुमानजी ने कहा- हे मुनि! पहले गुरुदक्षिणा ले लीजिए. पीछे आप मुझे मंत्र दीजिएगा. हनुमानजी ने उसके सिर को पूंछ में लपेटकर उसे पछाड़ दिया. मरते समय उसने अपना राक्षसी शरीर प्रकट किया. उसने राम-राम कहकर प्राण छोड़े. यह सुनकर हनुमानजी मन में हर्षित होकर चले.

उन्होंने पर्वत को देखा, पर औषध न पहचान सके. तब हनुमानजी ने एकदम से पर्वत को ही उखाड़ लिया. पर्वत लेकर हनुमानजी रात ही में आकाश मार्ग से दौड़ चले और अयोध्यापुरी के ऊपर पहुंच गए. भरतजी ने आकाश में अत्यंत विशाल स्वरूप देखा, तब मन में अनुमान किया कि यह कोई राक्षस है. उन्होंने कान तक धनुष को खींचकर बिना फल का एक बाण मारा. बाण लगते ही हनुमानजी ‘राम, राम, रघुपति’ का उच्चारण करते हुए मूर्च्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़े. प्रिय वचन (रामनाम) सुनकर भरतजी उठकर दौड़े और बड़ी उतावली से हनुमानजी के पास आए. हनुमानजी को व्याकुल देखकर उन्होंने हृदय से लगा लिया. बहुत तरह से जगाया, पर वे जागते न थे! तब भरतजी का मुख उदास हो गया. वे मन में बड़े दुःखी हुए और नेत्रों में विषाद के आंसुओं का जल भरकर ए वचन बोले- जिस विधाता ने मुझे श्री राम से विमुख किया, उसी ने फिर यह भयानक दुःख भी दिया. यदि मन, वचन और शरीर से श्री रामजी के चरणकमलों में मेरा निष्कपट प्रेम हो. और यदि श्री रघुनाथजी मुझ पर प्रसन्न हों तो यह वानर थकावट और पीड़ा से रहित हो जाए. यह वचन सुनते ही कपिराज हनुमानजी ‘कोसलपति श्री रामचंद्रजी की जय हो, जय हो’ कहते हुए उठ बैठे. भरतजी ने हनुमानजी को हृदय से लगा लिया, उनका शरीर पुलकित हो गया और नेत्रों में आनंद तथा प्रेम के आंसुओं का जल भर आया. रघुकुलतिलक श्री रामचंद्रजी का स्मरण करके भरतजी के हृदय में प्रीति समाती न थी.


भरतजी बोले- हे तात! छोटे भाई लक्ष्मण तथा माता जानकी सहित सुखनिधान श्री रामजी की कुशल कहो. हनुमानजी ने संक्षेप में सब कथा कही. सुनकर भरतजी दुःखी हुए और मन में पछताने लगे. हा देव! मैं जगत् में क्यों जन्मा? प्रभु के एक भी काम न आया. फिर कुअवसर (विपरीत समय) जानकर मन में धीरज धरकर बलवीर भरतजी हनुमानजी से बोले- हे तात! तुमको जाने में देर होगी और सबेरा होते ही काम बिगड़ जाएगा. (अतः) तुम पर्वत सहित मेरे बाण पर चढ़ जाओ, मैं तुमको वहां भेज दूं जहां कृपा के धाम श्री रामजी है. भरतजी की यह बात सुनकर एक बार तो हनुमानजी के मन में अभिमान उत्पन्न हुआ कि मेरे बोझ से बाण कैसे चलेगा? किन्तु फिर श्री रामचंद्रजी के प्रभाव का विचार करके वे भरतजी के चरणों की वंदना करके हाथ जोड़कर बोले- हे नाथ! हे प्रभो! मैं आपका प्रताप हृदय में रखकर तुरंत चला जाऊंगा. ऐसा कहकर आज्ञा पाकर और भरतजी के चरणों की वंदना करके हनुमानजी चले. भरतजी के बाहुबल, शील (सुंदर स्वभाव), गुण और प्रभु के चरणों में अपार प्रेम की मन ही मन बारंबार सराहना करते हुए मारुति श्री हनुमानजी चले जा रहे हैं. वहां लक्ष्मणजी को देखकर श्री रामजी साधारण मनुष्यों के अनुसार (समान) वचन बोले- आधी रात बीत चुकी है, हनुमान नहीं आए. यह कहकर श्री रामजी ने छोटे भाई लक्ष्मणजी को उठाकर हृदय से लगा लिया. और बोले- हे भाई! तुम मुझे कभी दुःखी नहीं देख सकते थे. तुम्हारा स्वभाव सदा से ही कोमल था. मेरे हित के लिए तुमने माता-पिता को भी छोड़ दिया और वन में जाड़ा, गरमी और हवा सब सहन किया.

 हे भाई! वह प्रेम अब कहां है? मेरे व्याकुलतापूर्वक वचन सुनकर उठते क्यों नहीं? यदि मैं जानता कि वन में भाई का विछोह होगा तो मैं पिता का वचन (जिसका मानना मेरे लिए परम कर्तव्य था) उसे भी न मानता. पुत्र, धन, स्त्री, घर और परिवार- ये जगत में बार-बार होते और जाते हैं, परन्तु जगत में सहोदर भाई बार-बार नहीं मिलता. हृदय में ऐसा विचार कर हे तात! जागो. जैसे पंख बिना पक्षी, मणि बिना सर्प और सूंड बिना श्रेष्ठ हाथी अत्यंत दीन हो जाते हैं, हे भाई! यदि कहीं जड़ दैव मुझे जीवित रखे तो तुम्हारे बिना मेरा जीवन भी ऐसा ही होगा. स्त्री के लिए प्यारे भाई को खोकर, मैं कौन सा मुंह लेकर अवध जाऊंगा? मैं जगत में बदनामी भले ही सह लेता (कि राम में कुछ भी वीरता नहीं है जो स्त्री को खो बैठे). स्त्री की हानि से (इस हानि को देखते) कोई विशेष क्षति नहीं थी. अब तो हे पुत्र! मेरे निष्ठुर और कठोर हृदय यह अपयश और तुम्हारा शोक दोनों ही सहन करेगा. हे तात! तुम अपनी माता के एक ही पुत्र और उसके प्राणाधार हो. सब प्रकार से सुख देने वाला और परम हितकारी जानकर उन्होंने तुम्हें हाथ पकड़कर मुझे सौंपा था. मैं अब जाकर उन्हें क्या उत्तर दूंगा? हे भाई! तुम उठकर मुझे सिखाते (समझाते) क्यों नहीं? (जारी है…)

प्रभु श्रीराम के नाम दीपक जलाएं… यहां क्लिक करें



Source link

Tags: गरचलयजबजमननपड़परबणभरतजमरचछतरकषससमझकरहकरहनमनज
Share198Tweet124Send

Related Posts

राहुल गांधी ने प्रोजेक्टर पर खड़गे का भाषण दिखाया:कहा- हल्द्वानी में उनकी सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण हुआ; प्रधानमंत्री दोषियों पर एक्शन लें
Hindi News

राहुल गांधी ने प्रोजेक्टर पर खड़गे का भाषण दिखाया:कहा- हल्द्वानी में उनकी सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण हुआ; प्रधानमंत्री दोषियों पर एक्शन लें

August 29, 2026
महिला एशिया कप 2026:भारत कल शुरू करेगा अभियान, थाईलैंड से है पहला मुकाबला; क्या हो सकती है प्लेइंग-11? जानें – Women’s Asia Cup 2026: India Begin Campaign Against Thailand, Consistency And Form In Focus
Hindi News

महिला एशिया कप 2026:भारत कल शुरू करेगा अभियान, थाईलैंड से है पहला मुकाबला; क्या हो सकती है प्लेइंग-11? जानें – Women’s Asia Cup 2026: India Begin Campaign Against Thailand, Consistency And Form In Focus

August 29, 2026
उज्बेकिस्तान के लिए रवाना हुए पीएम मोदी, SCO शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे, कहा- ‘आतंकवाद खत्म करेंगे’
Hindi News

उज्बेकिस्तान के लिए रवाना हुए पीएम मोदी, SCO शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे, कहा- ‘आतंकवाद खत्म करेंगे’

August 29, 2026
Mahindra ने पलट दिया MG का खेल, 7-सीटर SUV पर लाई गजब ऑफर, इतनी है कीमत – mahindra xev 9s xev 9e baas launch price range features auam
Hindi News

Mahindra ने पलट दिया MG का खेल, 7-सीटर SUV पर लाई गजब ऑफर, इतनी है कीमत – mahindra xev 9s xev 9e baas launch price range features auam

August 29, 2026
Load More
  • Trending
  • Comments
  • Latest
9 Festivals to Celebratein August in India

9 Festivals to Celebratein August in India

August 8, 2025
Corruption cases against govt officials: SC bats for striking balance | Latest News India

Corruption cases against govt officials: SC bats for striking balance | Latest News India

August 5, 2025
Guru Randhawa – SIRRA ( Official Video )

Guru Randhawa – SIRRA ( Official Video )

July 1, 2025
राहुल गांधी ने प्रोजेक्टर पर खड़गे का भाषण दिखाया:कहा- हल्द्वानी में उनकी सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण हुआ; प्रधानमंत्री दोषियों पर एक्शन लें

राहुल गांधी ने प्रोजेक्टर पर खड़गे का भाषण दिखाया:कहा- हल्द्वानी में उनकी सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण हुआ; प्रधानमंत्री दोषियों पर एक्शन लें

0
COVID-19: Delhi govt-run medical colleges to re-open; students to join in phased manner

COVID-19: Delhi govt-run medical colleges to re-open; students to join in phased manner

0
WhatsApp updates terms of service, privacy policy for user data processing and Facebook integration- The New Indian Express

WhatsApp updates terms of service, privacy policy for user data processing and Facebook integration- The New Indian Express

0
Video captures moment when Himalayan glacier collapsed, leading to catastrophic Nepal-Tibet flash flood

Video captures moment when Himalayan glacier collapsed, leading to catastrophic Nepal-Tibet flash flood

August 29, 2026
Shooter Ashi Chouksey Looking Forward To Chinese Challenge At Asian Games: ‘Looking For Revenge’ | Other-sports News

Shooter Ashi Chouksey Looking Forward To Chinese Challenge At Asian Games: ‘Looking For Revenge’ | Other-sports News

August 29, 2026
राहुल गांधी ने प्रोजेक्टर पर खड़गे का भाषण दिखाया:कहा- हल्द्वानी में उनकी सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण हुआ; प्रधानमंत्री दोषियों पर एक्शन लें

राहुल गांधी ने प्रोजेक्टर पर खड़गे का भाषण दिखाया:कहा- हल्द्वानी में उनकी सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण हुआ; प्रधानमंत्री दोषियों पर एक्शन लें

August 29, 2026
India News Online

24x7 Online News From India
India News Online is your news, entertainment, music fashion website. We provide you with the latest breaking news and videos straight from the entertainment industry.

Categories

  • Business
  • Entertainment
  • Health
  • Hindi News
  • Hindi Songs
  • India
  • International
  • Lifestyle
  • Panjab
  • Politics
  • Punjabi Songs
  • Sports
  • Technology
  • Travel
  • Uncategorized
No Result
View All Result

Recent Posts

  • Video captures moment when Himalayan glacier collapsed, leading to catastrophic Nepal-Tibet flash flood
  • Shooter Ashi Chouksey Looking Forward To Chinese Challenge At Asian Games: ‘Looking For Revenge’ | Other-sports News
  • राहुल गांधी ने प्रोजेक्टर पर खड़गे का भाषण दिखाया:कहा- हल्द्वानी में उनकी सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण हुआ; प्रधानमंत्री दोषियों पर एक्शन लें
  • Home
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Privacy Policy
  • Cookie Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact

Copyright © 2021 - India News Online.

No Result
View All Result
  • Home
  • News
    • India
    • Punjab
    • International
    • Entertainment
  • Hindi News
  • Politics
  • Health
  • Business
  • Sports
  • Technology
  • Lifestyle
  • Video
  • Travel
  • Game

Copyright © 2021 - India News Online.