ओटीटी के आने के बाद से जिस एक सितारे के अभिनय के नए नए आयाम हिंदी फिल्म दर्शकों को देखने को मिले हैं, वह हैं मनोज बाजपेयी। बीते साल मनोज ने ‘गुलमोहर’, ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ और ‘जोरम’ में अपने अभिनय के विविध आयाम दिखाए। इन किरदारों के लिए उन्हें इनाम भी खूब मिले। अब नए साल की अपनी पहली वेब सीरीज ‘किलर सूप’ में बिल्कुल अलहदा अवतार में दिखने को तैयार मनोज बाजपेयी से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की एक खास बातचीत।
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बीते साल आपने ‘गुलमोहर’, ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ और ‘जोरम’ में बिल्कुल भिन्न भिन्न किरदार निभाए। इतने विरोधाभासी चरित्र निभाना कितना मुश्किल होता होगा?
और, कई बार ऐसा करते करते आप वाकई खो भी जाते हैं, फिर आपको नींद की गोलियां खानी पड़ती हैं..
क्या करें, ये तो एक अभिनेता होने का श्राप है। ‘गली गुलियां’ के बारे में तो अब सबको पता ही है लेकिन उससे पहले मुझे किसी किरदार को करने के बाद अगर मानसिक समस्या हुई थी तो वह हुई थी फिल्म ‘शूल’ के बाद। मुझे नींद नहीं आती थी। जैसे ही सोने जाता था, मुझे अजीब अजीब से ख्याल आते थे। बहुत ही हिंसक विचार आने शुरू हो जाते थे। मेरी तबियत खराब रहने लगी थी। अब सोचता हूं तो लगता है कि ऐसा भी क्या था, कि मैंने क्यूं ऐसा किया..
और, अभिनय से पहले रिहर्सल को कितना जरूरी मानते हैं आप?
बहुत जरूरी है। खासतौर से अगर आपकी मातृभाषा वह नहीं है जिसमें आप अभिनय कर रहे हैं। इसका सबसे अच्छा तरीका है कि आप उस किरदार को अपने सिस्टम का हिस्सा बना लो। आप उसकी शख्सीयत को ओढ़ लो। मैं बहुत सारे ऐसे कलाकारों के साथ काम करता हूं जिनकी मुख्यभाषा हिंदी नहीं है। उनको मैं कोंकणा सेन शर्मा का उदाहरण देता हूं, संवादों की रिहर्सल में समय लगाने का, मेहनत करने का।
बात चूंकि नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘किलर सूप’ के सिलसिले में हो रही है तो खाने के मामले में आप कितने शौकीन है, आपकी फिटनेस देखकर तो लगता नहीं कि आपको ऐसा कोई शौक होगा?
अरे, मैं बहुत शौकीन हूं खाने का। मुझे खाना खाने का शौक हमेशा से रहा है। बिहारी आदमी हूं। बिहारियों को अमूमन खाना बहुत अच्छा लगता है। सुबह का नाश्ता कर रहे होते हैं तो दोपहर के भोजन में क्या बनेगा, इस पर चर्चा हो रही होती है..! लेकिन, बनाने का शौक मुझे बहुत नया हुआ है। अभी पांच साल पहले से मैंने खाना बनाना शुरू किया है। मैंने अपने पिता की मटन बनाने की रेसिपी बनाई है। यखनी पुलाव बनाया। भुना गोश्त बनाया और शाकाहारी लोगों के लिए मैंने आलू परवल और आलू गोभी भी बनाई। मछली भी बनाता हूं, सरसों वाली। बिहार और बंगाल की खाने और भाषा की संस्कृति भी बहुत करीब की है।



























