
सांकेतिक तस्वीर।
विस्तार
पंजाब सरकार की ओर से नशा मुक्ति केंद्रों व आउट पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओट) क्लीनिकों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के दावे तो किए जा रहे हैं लेकिन इनमें इलाज करा रहे मरीजों की संख्या ने सरकार के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में पंजीकृत मरीजों की कुल संख्या 2,77,384 है, जबकि राज्य में चल रहे निजी नशामुक्ति केंद्रों में पंजीकृत मरीजों की संख्या 6,72,123 है। यानी प्राइवेट नशा मुक्ति केंद्रों में सरकारी केंद्रों से ढाई गुना ज्यादा मरीज हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निजी नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों की इतनी बड़ी तादाद की जांच करने का फैसला किया है।
विभाग यह जानना चाह रहा है कि 528 ओट क्लीनिकों और 216 नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों की देखभाल और दवाओं की उपलब्धता के बावजूद मरीज निजी केंद्रों को तरजीह क्यों दे रहे हैं? हाल ही में राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में स्थापित निजी नशा मुक्ति केंद्रों की ओर से दवाओं की आड़ में नशा बेचे जाने के मामले उजागर हुए थे, जिसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग राज्य के निजी केंद्रों में पंजीकृत मरीजों की संख्या का आकलन करेगा, ताकि मरीजों की संख्या के आधार पर निजी केंद्रों की ओर से खरीदी जा रही नशा छुड़ाने संबंधी दवाओं की खपत का भी आकलन हो सके। इस अभियान के तहत ही सरकारी ओट क्लीनिकों में मरीजों को मिल रही सुविधाओं का भी आकलन किया जाएगा और इन केंद्रों को ओर अधिक साधन संपन्न बनाया जाएगा।
सबसे ज्यादा संख्या लुधियाना में
स्वास्थ्य विभाग ने अपनी पूर्व समीक्षा में पाया था कि ओट क्लीनिकों और नशा मुक्ति क्लीनिकों में नशा छोड़ने वालों की संख्या में कमी का मुख्य कारण यह भी है कि नशा छोड़ने के इरादे से आने वाले ज्यादातर मरीज हेरोइन और स्मैक जैसे नशों के आदी होते हैं और ओट क्लीनिक में आकर अन्य छोटे नशे करने लगते हैं।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में इस समय कुल 9,49,507 मरीज सरकारी व निजी नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज करा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर मरीजों को दवा देकर घर पर रहने को कहा जाता है। नशे से अत्याधिक प्रभावित मरीजों को ही केंद्रों में भर्ती कर इलाज किया जाता है। इन्हीं आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि राज्य में नशे से पीड़ित मरीजों की सबसे ज्यादा संख्या लुधियाना जिले में जबकि मोगा दूसरे, पटियाला तीसरे, संगरूर चौथे और तरनतारन पांचवें स्थान पर हैं।

























