वॉशिंगटन3 मिनट पहले
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बाइडेन और जिनपिंग की मुलाकात सैन फ्रांसिस्को के बे-एरिया में होगी। इस दौरान मीडिया को एंट्री नहीं मिलेगी। (फाइल)
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका पहुंच गए हैं। वो सैन फ्रांसिस्को में APEC यानी एशिया-पैसेफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन समिट में शामिल होंगे। जिनपिंग यहां अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से भी मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं का फोकस अमेरिका-चीन के बीच तनाव कम करने पर रहेगा।
बाइडेन और जिनपिंग के बीच इजराइल-हमास और रूस-यूक्रेन जंग पर चर्चा हो सकती है। न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉइस ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट्स के मुताबिक- इस मुलाकात से किसी बड़ी कामयाबी की उम्मीद कम है, लेकिन दुनिया की दो आर्थिक महाशक्तियों के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत जरूरी है। इस मुलाकात को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।

चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग सुबह करीब 5:00 बजे अमेरिका पहुंचे।
तनाव कम करने की बुनियाद रखना जरूरी
- ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के मुताबिक- इस मुलाकात के किसी बड़े नतीजे के लिहाज से देखना बेहतर नहीं होगा। दोनों देशों के पास ये मौका कि उनके रिश्ते इस वक्त जिस हाल में हैं, उन्हें और खराब होने से रोका जाए।
- फरवरी में चीन के एक स्पाय बैलून को अमेरिका ने मार गिराया था। इसके बाद वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच रिश्ते अब तक के सबसे खराब दौर में पहुंच गए थे। ट्रेड रिलेशन्स को लेकर टेंशन पहले ही काफी ज्यादा थी। ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया और चीन की कई कंपनियों को इस दलील के साथ बैन कर दिया कि उनके चीनी फौज से सीधे ताल्लुक हैं।
- माना जा रहा है कि बाइडेन और जिनपिंग की पहली कोशिश किसी भी तरह के रिस्क को कम करना होगी, ताकि रिश्ते टूटने का खतरा न रहे। अमेरिकी अफसरों का कहना है कि वो दोनों देश एक-दूसरे को चैलेंज न समझें।

2015 में एक अमेरिकी वॉरशिप चीन पहुंचा था। इस वक्त तक दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव नहीं के बराबर था। अब ये काफी ज्यादा हो चुका है।
एक-दूसरे की जरूरत को समझें
- अमेरिका की कॉमर्स सेक्रेटरी गिना रेमांडो के मुताबिक- हम चीन से करीब 700 अरब डॉलर का ट्रेड करते हैं। इसमें 99% ट्रेड ऐसा है, जिसका एक्सपोर्ट कंट्रोल से कोई संबंध नहीं है।
- अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जैक सुलिवन कहते हैं- चीन और अमेरिका आर्थिक तौर पर एक-दूसरे पर निर्भर हैं। वहीं, ट्रेजरी सेक्रेटरी जेनेट येलेन तो वॉर्निंग देती हैं। उनके मुताबिक- अगर अमेरिका और चीन आर्थिक रिश्ते तोड़ लेते हैं तो पूरी दुनिया को खराब नतीजे भुगतने होंगे।
- पिछले महीने अमेरिकी सांसदों का दल बीजिंग गया था। इससे मुलाकात में जिनपिंग ने कहा था- अमेरिका और चीन के रिश्ते बेहतर करने की हजार वजह हैं और इनको खराब करने का एक भी कारण नहीं बताया जा सकता।

तस्वीर 6 जुलाई की है। तब साउथ चाइना सी में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS निमित्ज और USS रोनाल्ड रीगन गश्त कर रहे थे। इसके एक दिन पहले एक चीनी वॉरशिप ने अमेरिकी बोट को घेरने की कोशिश की थी।
मिलिट्री कम्युनिकेशन सबसे जरूरी
- न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को मानें तो अमेरिका और चीन के बीच मिलिट्री कम्युनिकेशन बहाल करना बेहद जरूरी है। पिछले साल तब की हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान गईं थीं। इसके बाद से दोनों सेनाओं के बीच कम्युनिकेशन नहीं के बराबर है।
- बहुत मुमकिन है कि बाइडेन बातचीत के दौरान जिनपिंग को यह भरोसा दिलाएं कि अमेरिका ‘वन चाइना’ पॉलिसी को सपोर्ट करता है। हालांकि, वो जिनपिंग को ये भी जरूर बताएंगे कि अमेरिका में अगले साल होने वाले प्रेसिडेंट इलेक्शन में चीन की दखलंदाजी नजर नहीं आनी चाहिए। अमेरिका ने आरोप लगाया था कि पिछले राष्ट्रपति चुनाव (2021) में रूस और चीन ने दखलंदाजी की कोशिश की थी।
- इसके अलावा ड्रग स्मगलिंग और क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर भी बाइडेन चीन से मदद करने को कहेंगे। जिनपिंग अमेरिका के बिजनेस लीडर्स से भी मुलाकात करेंगे और उन्हें बताएंगे कि चीन फॉरेन इन्वेस्टमेंट के लिहाज से बिल्कुल सही देश है। इसकी वजह यह है कि कई बड़ी विदेशी कंपनियां चीन को बिजनेस के लिहाज से खराब बताते हुए वहां से किसी और देश में कारोबार शिफ्ट कर रही हैं।
- खास बात ये है कि बाइडेन और जिनपिंग मीडिया के किसी सवाल का जवाब नहीं देंगे और न ही मीटिंग रूम में मीडिया को एंट्री मिलेगी।

















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