कोलकाता/नई दिल्ली14 मिनट पहले
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ED ने पॉलिटिकल कंसल्टेंट फर्म I-PAC के ऑफिस पर गुरुवार को छापे मारे हैं।
पश्चिम बंगाल में गुरुवार को कोलकाता में बड़ा सियासी ड्रामा हुआ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दो टीमें सुबह-सुबह इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के दो ठिकानों पर पहुंची।
ईडी 2020 के कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच कर रही है। एक टीम ने आई-पैक के डायरेक्टर प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर तो दूसरी ने सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा।
प्रतीक बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की IT सेल के प्रमुख भी हैं। वही ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति बनाते हैं। इसलिए जब सीएम ममता को छापे की सूचना मिली तो वे पुलिस अफसरों के साथ सीधे प्रतीक के घर पहुंच गईं। 20-25 मिनट यहीं रहीं और फिर एक फाइल फोल्डर लेकर निकल गईं।
इसके बाद वे प्रतीक के दफ्तर गईं। यहां से करीब 3:30 घंटे बाद निकलीं। देश में संभवत: पहली बार है, जब किसी सीएम ने छापे के बीच ऐसा कदम उठाया हो। ईडी ने इस मामले में देशभर में 10 ठिकानों पर छापे मारे। इनमें 6 बंगाल तो 4 दिल्ली के हैं।
ममता ने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। कहा है कि मुझे माफ करें प्रधानमंत्री जी, कृपया अपने गृह मंत्री को कंट्रोल करें। इस कार्रवाई के विरोध में ममता आज 2 बजे मार्च निकालेंगी।

ED के अफसरों ने प्रतीक के घर और ऑफिस से कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए।
8 जनवरी: प्रतीक जैन के ठिकानों पर रेड की टाइमलाइन
सुबह 6:30 बजे: एक टीम ने सबसे पहले ऑफिस पर छापा मारा। दफ्तर सूना था। उसने सभी डिजिटल डिवाइस, भौतिक दस्तावेजों की जांच की। सुबह 7:30 बजे: दूसरी टीम प्रतीक जैन के घर पहुंची। वह एक बिल्डिंग की चौथी मंजिल में रहते हैं। टीम ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। दोपहर 12 बजे: ममता प्रतीक के घर पहुंचीं और 19 मिनट बाद बाहर निकलीं, तब उनके हाथ में एक ग्रीन फाइल फोल्डर था। दोपहर 1 बजे: ममता घर से 15 किमी दूर आई-पैक के ऑफिस पहुंचीं। तब केंद्रीय बलों ने बिल्डिंग की एंट्री और एग्जिट बंद कर दी थी, इसलिए ममता बेसमेंट की लिफ्ट से सीधे 11वीं मंजिल पर पहुंचीं। उनके साथ राज्य के डीजीपी राजीव कुमार थे। ये वही राजीव हैं, जिनके घर 2019 में सीबीआई ने छापा मारा था, तब विरोध में ममता वहीं धरने पर बैठ गई थीं। शाम 4:22 बजे: ममता बाहर आईं। उनके पीछे सीएमओ के अफसर हाथों में फाइलें लिए थे। उन्होंने फाइलें काफिले की गाड़ी में पीछे की सीट पर रखीं।

ममता 8 जनवरी की दोपहर 12 बजे I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंचीं।

ममता ने हाथ में फाइल लेकर मीडिया को संबोधित किया।
प. बंगाल गर्वनर को बम ब्लास्ट की धमकी का ई-मेल
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को गुरुवार देर रात ई-मेल के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई। लोक भवन के सीनियर अफसर धमकी की पुष्टि की है। अधिकारी के मुताबिक ई-मेल में राज्यपाल को बम से उड़ा देने की धमकी दी गई है। धमकी भेजने वाले ने ई-मेल में अपना मोबाइल नंबर भी लिखा है।
भाजपा IT सेल के हेड अमित मालवीय ने कहा- ममता बनर्जी के राज में आपका स्वागत है, जहां गवर्नर भी सुरक्षित नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। गृह मंत्री, ममता बनर्जी, कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी एक प्राइवेट फर्म को बचाने के लिए ED से सबूत वाली फाइलें छीनने में व्यस्त हैं। ममता बनर्जी एक पूरी तरह से नाकामयाब नेता हैं। पूरी खबर पढ़ें…

ऐसे पहुंचा घोटाले का पैसा…
ईडी ने बताया कि 27 नवंबर 2020 को सीबीआई कोलकाता ने एक एफआईआर दर्ज की थी। फिर मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज हुआ। जांच में अनूप मांझी के सिंडिकेट का पता चला, जो ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के लीज होल्ड इलाके से कोयला चोरी कर फैक्ट्रियों में खपाता था।
ईडी का दावा है कि इस अवैध कारोबार से अर्जित धन एक प्रमुख हवाला ऑपरेटर ने आई-पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लि. तक पहुंचाया।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा, कल सुनवाई
सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में ED ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उधर, I-PAC ने भी सर्च की वैधता को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस सुवरा घोष की बेंच में होगी।
वहीं, प्रतीक जैन के परिवार ने शेक्सपीयर सरानी पुलिस स्टेशन में ED अधिकारियों के खिलाफ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चोरी का आरोप लगाते हुए शिकायत कराने का फैसला किया है।
ममता का आरोप- यह कार्रवाई घटिया और शरारती गृह मंत्री करवा रहे
- सीएम ममता ने छापेमारी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और इसके पीछे BJP की साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि क्या ईडी और अमित शाह का काम पार्टी की हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची जब्त करना है? यह एक घटिया और शरारती गृह मंत्री है, जो देश की सुरक्षा नहीं कर पा रहा है। मेरी पार्टी के सभी दस्तावेज उठाकर ले गए हैं। एक तरफ वे पश्चिम बंगाल में SIR के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने का काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ इस तरह की कार्रवाई की जा रही है।
- मुझे माफ करें प्रधानमंत्री जी, कृपया अपने गृह मंत्री को कंट्रोल करें। अगर आप (BJP) हमसे लड़ नहीं सकते, तो आप बंगाल क्यों आ रहे हैं? हमें लोकतांत्रिक तरीके से हराइए। आप हमारी एजेंसियों का इस्तेमाल हमारे कागजात, हमारी रणनीति, हमारे वोटर्स, हमारे डेटा, हमारे बंगाल को लूटने के लिए कर रहे हैं। यह सब करके, आपको जितनी सीटें मिल रही थीं, वे घटकर जीरो हो जाएंगी।

ED का जवाब- छापे सबूतों के आधार पर डाले गए
ED ने कहा कि कोलकाता में I-PAC के ठिकानों पर छापे पूरी तरह सबूतों के आधार पर किए जा रहे हैं। यह किसी राजनीतिक दल या चुनाव से जुड़ा मामला नहीं है। यह कार्रवाई हवाला, अवैध कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस में हो रही है।
ED ने बताया कि कार्रवाई 2020 में CBI के दर्ज उस मामले से जुड़ी है, जो अनुप माजी उर्फ लाला के कोयला तस्करी सिंडिकेट से जुड़ा है। आरोप है कि सिंडिकेट ने पूर्वी कोलफील्ड्स के आसनसोल और आसपास के (पश्चिम बर्धमान) इलाकों में कोयले की चोरी और अवैध खुदाई की।
ED का दावा है कि कोयला तस्करी से जुड़े एक हवाला ऑपरेटर ने Indian PAC Consulting Pvt Ltd (I-PAC) को करोड़ रुपए के लेनदेन कराए। एजेंसी के अनुसार, I-PAC भी हवाला धन से जुड़ी इकाइयों में शामिल है।
ED ने कहा कि कार्रवाई शांतिपूर्ण और पेशेवर ढंग से चल रही थी, लेकिन ममता बनर्जी के बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ पहुंचने के बाद जांच में रुकावट पैदा हुई।

I-PAC के ऑफिस के बाहर एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की टीम और सुरक्षाबल।
भाजपा ने कहा- ममता ने केंद्रीय एजेंसियों के काम में दखल दिया
बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘मैं छापेमारी पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। ED डिटेल्स दे सकती है। ममता बनर्जी ने केंद्रीय एजेंसियों के काम में दखल दिया। ममता ने आज जो किया, वह जांच में बाधा डालना था। मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। IPAC ऑफिस में वोटर लिस्ट क्यों मिली। क्या IPAC कोई पार्टी ऑफिस है।’
सीनियर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि I-PAC एक कॉरपोरेट इकाई होते हुए भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आंख और कान की तरह काम करती है। पश्चिम बंगाल में पार्टी की चुनावी जीत सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक रूप से अनैतिक गतिविधियों में शामिल है।
नॉलेज पॉइंट: जानिए I-PAC के बारे में

ममता अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर प्रतीक जैन (दाएं) के साथ। यह फोटो प्रतीक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 4 जून 2024 को पोस्ट की थी।
- I-PAC (Indian Political Action Committee) एक पॉलिटिकल कंसलटेंट फर्म है। इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन हैं।
- यह राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति, डेटा-आधारित कैंपेन, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच में मदद करती है।
- I-PAC पहले Citizens for Accountable Governance (CAG) थी। इसकी शुरुआत 2013 में प्रशांत किशोर ने प्रतीक के साथ की थी। बाद में इसका नाम I-PAC रखा गया।
- प्रशांत किशोर के हटने के बाद I-PAC की कमान प्रतीक के पास आ गई।
- प्रशांत ने बाद में बिहार में ‘जन सुराज’ पार्टी बनाई।
- I-PAC तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ 2021 से जुड़ी है।

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