-वन और कृषि गतिविधियों से जुड़े मुद्दे पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सिसवां गांव और उसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर हलफनामों में आई गंभीर विसंगतियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) को निर्देश दिया कि वह एसएएस नगर (मोहाली) जिले में स्थित सभी डिफॉल्टरों का ब्यौरा देते हुए एक नई और समग्र रिपोर्ट दाखिल करे। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति नीरजा कुलवंत कौर की खंडपीठ ने दिया।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वन विभाग ने 182 डिफॉल्टरों की जानकारी दी जबकि गमाडा के हलफनामे में केवल 28 डिफॉल्टरों का उल्लेख किया गया। अदालत ने इस पर गहरी आपत्ति जताई और कहा कि वन विभाग की ओर से दाखिल जवाब में 182 डिफॉल्टर बताए गए हैं, जबकि गमाडा के हलफनामे में केवल 28 डिफॉल्टरों का उल्लेख है। इस तरह की अस्पष्टता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने गमाडा से यह भी निर्देश दिया कि वह पूरे एसएएस नगर जिले में अवैध निर्माणों और डिफॉल्टरों की समग्र सूची पेश करे।
सिसवां क्षेत्र में गैर-वन और गैर-कृषि गतिविधियों की जांच
यह आदेश उन कार्यवाहियों की कड़ी है जिनमें हाईकोर्ट ने सिसवां गांव में चल रही गैर-वन और गैर-कृषि गतिविधियों की पूरी जानकारी मांगी थी। यह इलाका लंबे समय से निर्माण गतिविधियों और पर्यावरणीय उल्लंघनों के कारण विवादों में रहा है। अदालत ने पंजाब सरकार को 17 नवंबर को दिए आदेश में कहा था कि सिसवां गांव में चल रही गैर-वन और गैर-कृषि गतिविधियों का पूरा विवरण रिकॉर्ड पर लाया जाए। गमाडा को भी निर्देश दिया गया था कि वह इस प्रकार की गतिविधियों की कुल संख्या और अवैध निर्माणों की सूची पेश करे, साथ ही क्षेत्र का मानचित्र भी दाखिल करे।
पीएलपीए से डीलिस्टिंग पर सवाल
हाईकोर्ट ने पीएलपीए (पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम) से डीलिस्ट किए गए 169.22 हेक्टेयर भूमि के संबंध में भी सवाल उठाए। अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि वह 26 अप्रैल 2010 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक की पूरी कार्यवाही रिकॉर्ड पर लाए। इसके अलावा, डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर को निर्देश दिया गया कि वह यह स्पष्ट करें कि डीलिस्टिंग के बाद कितने निर्माण किए गए और सिसवां में कुल कितनी गैर-वन और गैर-कृषि गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
अब 10 फरवरी को होगी सुनवाई
अदालत ने गमाडा और वन विभाग को इन निर्देशों के पालन के लिए समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को निर्धारित की है। अदालत की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि सिसवां और आसपास के क्षेत्रों में अवैध निर्माणों पर नजर रखने के लिए अदालत काफी गंभीर है और पर्यावरणीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।






























