मजीठा में मजीठिया फैक्टर
मजीठा विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से मजीठिया परिवार की राजनीतिक पहचान रहा है। 2007, 2012 और 2017 में बिक्रम सिंह मजीठिया ने यहां से जीत दर्ज की। 2022 में उन्होंने अमृतसर पूर्व से चुनाव लड़ा, जबकि मजीठा से उनकी पत्नी गनीव कौर मजीठिया मैदान में उतरीं और उन्होंने 57,027 वोट हासिल कर 26,062 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
2022 में आम आदमी पार्टी के सुखजिंदर राज सिंह लाली मजीठिया 30,965 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के जगविंदर पाल सिंह जग्गा मजीठिया को 26,008 वोट मिले। इससे साफ है कि अकाली दल की बढ़त के बावजूद विपक्षी दलों के पास यहां पर्याप्त वोट आधार मौजूद है।
पुराने रिश्तों की परीक्षा भी
तलबीर सिंह गिल के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजीठिया परिवार के उस व्यक्तिगत प्रभाव को तोड़ना होगी, जो वर्षों से मजीठा की राजनीति में दिखाई देता है। वहीं गिल के पास अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के तौर पर हलके में पुराना संपर्क और संगठनात्मक अनुभव है।
सवाल यह भी है कि क्या गिल अपने पुराने राजनीतिक संबंधों और व्यक्तिगत संपर्कों को आम आदमी पार्टी के पक्ष में वोट में बदल पाएंगे? क्या अकाली दल के पारंपरिक कार्यकर्ताओं में उनके प्रभाव का कोई हिस्सा अब उनके साथ जाएगा? यही आने वाले चुनाव में मजीठा के सबसे महत्वपूर्ण सवालों में शामिल रहेगा।
नशा, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा को लेकर विपक्ष उठा रहा सवाल
मजीठा हलके की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और खेती यहां की अर्थव्यवस्था का अहम आधार है। ऐसे में सड़क, पेयजल, सीवरेज, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और किसानों से जुड़े मुद्दे लोगों के लिए अहम हैं। इन्हीं सब बातों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
खासकर मजीठिया का अपना बेहद करीबी रहा तलबीर सिंह गिल की ओर से इन्हीं मुद्दों को लेकर घेरा जा रहा है। हलके के ग्रामीण इलाकों में सड़कें, गलियां और जलनिकासी व्यवस्था प्रमुख स्थानीय मुद्दों में शामिल हैं। बरसात के दौरान कई जगह पानी जमा होने से लोगों को परेशानी होती है। गंभीर बीमारी या विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत पड़ने पर लोगों को अमृतसर जाना पड़ता है। किसानों के सामने सिंचाई, फसल लागत, मंडी व्यवस्था और मजदूरों की उपलब्धता जैसे मुद्दे हैं। हलके के युवाओं के लिए रोजगार एक अहम मुद्दा है।




















